BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

आईन-ए-अकबरी के रचयिता:

Detailed Explanation

अबुल फजल ने इसे लिखा।
Share:

Related Questions

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में सर ह्यू रोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा झाँसी के दुर्ग की घेराबंदी किए जाने के उपरांत, रानी लक्ष्मीबाई झाँसी से सुरक्षित निकलकर कालपी पहुँचीं, जहाँ उन्होंने तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक संयुक्त सैन्य मोर्चा तैयार किया था। 2. कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने चंबल नदी पार कर ग्वालियर के सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) को अपनी ओर मिलाने में सफलता प्राप्त की, जिनके सैनिकों ने ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया और नाना साहब को पेशवा घोषित किया। 3. ग्वालियर के पतन के पश्चात जून 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यू रोज़ के साथ हुए अंतिम निर्णायक युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से बचकर निकल निकलने में सफल रहे और बाद में उन्होंने राजस्थान तथा मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखा था। 4. तात्या टोपे को उनके एक विश्वासघाती जमींदार (मानसिंह नरवर) के सहयोग से ब्रिटिश सेना द्वारा सोते हुए पकड़ लिया गया, और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की सक्रिय भूमिका तथा उनके कूटनीतिक एवं सैन्य प्रबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब ने कानपुर में ब्रिटिश छावनी पर अधिकार करने के पश्चात स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में मराठा गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समक्ष कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अंतिम समय तक युद्धरत रहे। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार, वकील और दार्शनिक मार्गदर्शक थे, ने विद्रोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए तुर्की (ऑटोमन साम्राज्य) और अन्य यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया था। 3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के बाद नाना साहब की सेना के प्रमुख कमांडर के रूप में न केवल बुंदेलखंड और मध्य भारत के क्षेत्रों को संभाला, बल्कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर के किले पर अधिकार करने में भी निर्णायक भूमिका निभाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के राजनीतिक, प्रशासनिक और स्थापत्य विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी विजय के स्मरणोत्सव स्वरूप महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य आरंभ कराया था। 2. चोल राजवंश के उत्तरमेरूर शिलालेख (परांतक प्रथम के शासनकाल के) से ग्राम प्रशासन की स्वायत्तता का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसके अनुसार 'उर' सामान्य ग्राम सभा थी, 'सभा' अग्रहार या ब्राह्मण बहुल गाँवों की स्वायत्त सभा थी, और 'नगरम्' व्यापारियों की संस्था थी। 3. हर्षवर्धन के शासनकाल में आयोजित 'कन्नौज की महाधर्म परिषद' का मुख्य उद्देश्य केवल हीनयान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना था, और चीनी यात्री ह्वेनसांग ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के हाथों हुई पराजय का अपनी यात्रा वृत्तांत में पूर्णतः खंडन किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा कहाँ स्थित है? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके परिप्रेक्ष्य में आरंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा करते हुए 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था। 2. लार्ड कर्ज़न ने बंगाल विभाजन का मुख्य आधार प्रशासनिक असुविधा और बड़े प्रांत का कुशल संचालन बताया था, परंतु गुप्त शासकीय दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो गया कि इसका असली उद्देश्य उभरते हुए बंगाली राष्ट्रवाद की ताकत को तोड़ना और संप्रदाय के आधार पर बंगाल को विभाजित करना था। 3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने की तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रबीन्द्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी' ताकि हिंदू और मुस्लिम एकता का प्रदर्शन किया जा सके। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना 15 अगस्त 1906 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का बहिष्कार कर साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षण संस्थानों का विकास करना था, जिसके प्रथम अध्यक्ष अरबिंदो घोष बनाए गए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.