BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
16 views

हुमायूँनामा की लेखिका:

Detailed Explanation

हुमायूँ की बहन गुलबदन बेगम ने लिखा।
Share:

Related Questions

सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की बस्तियों के नगर नियोजन, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश बस्तियों में नगर दो भागों में विभाजित थे—पश्चिमी भाग जो ऊंचे टीले पर स्थित था (जिसे दुर्ग या गढ़ कहा जाता था) और पूर्वी भाग जो सामान्यतः बड़ा तथा निचले इलाके में बसा आवासीय क्षेत्र था, किंतु 'धोलावीरा' एकमात्र ऐसा प्रमुख स्थल है जो तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था। 2. लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने (Bead-making), सीप की वस्तुएं बनाने और मुहरें तैयार करने के कारखाने मिले हैं, तथा चान्हूदरो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ बिना दुर्ग वाला (Fortless) शहर मिला है। 3. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कपास की खेती करने वाले विश्व के सबसे शुरुआती लोग थे, जिसे ग्रीक लोगों द्वारा 'सिंडन' (Sindon) कहा जाता था, और यहाँ के निवासियों द्वारा मेसोपोटामिया के साथ होने वाले समुद्री व्यापार के प्रमाण दिलमुन और मगन के साथ विनिमय संबंधों से मिलते हैं। 4. सिंधु सभ्यता की बस्तियों में पक्की ईंटों के प्रयोग के साथ-साथ जल निकासी प्रणाली अद्वितीय थी, जिसमें घरों का गंदा पानी ढकी हुई नालियों के माध्यम से सड़कों के किनारे बनी मुख्य नालियों में जाता था, किंतु मोहनजोदड़ो के प्रत्येक घर में निजी कुओं का पूर्ण अभाव था और लोग केवल सार्वजनिक स्नागार के जल पर निर्भर थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गायों का दुग्ध दोहन करती थी, और इस काल में सभा एवं समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता होती थी। 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म पर आधारित हो गया तथा कृषि अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण तांबे (लोहित अयस) के साथ-साथ लोहे (कृष्ण अयस) का व्यापक प्रयोग प्रारंभ हुआ, जिससे समाज में क्षेत्रीय राज्यों (जनपदों) का उदय हुआ। 3. शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में गंधार, केकय और पांचाल राज्यों के साथ-साथ कृषि की चारों अवस्थाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, जबकि इसमें विदेघ माधव की कथा का भी उल्लेख है जिसके अनुसार अग्नि ने सरस्वती नदी तक के क्षेत्र को जलाया था। 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'अरण्यक' ग्रंथों को 'रहस्य पुस्तकें' भी कहा जाता है, जिनकी रचना वनों में एकांत में की गई थी और ये मुख्य रूप से यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर दार्शनिक चिंतन तथा आत्मविद्या पर बल देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोहियों के पास एक सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, आधुनिक केंद्रीय नेतृत्व तथा अखिल भारतीय स्तर पर एक साझा भविष्य का प्रशासनिक एजेंडा नहीं था, जिसके कारण यह क्षेत्रीय असंतोष तक सीमित होकर रह गया। 2. अधिकांश भारतीय रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और शिक्षित मध्य वर्ग ने ब्रिटिश सत्ता के प्रति वफादारी दिखाई या तटस्थ रहे, क्योंकि उन्हें भय था कि विद्रोह की सफलता से देश में सामंती अराजकता फैल जाएगी। 3. आधुनिक संचार साधनों—जैसे टेलीग्राफ, रेलवे और आधुनिक डाक व्यवस्था—का पूर्ण नियंत्रण अंग्रेजों के पास था, जिससे उन्हें देश के दूरदराज के हिस्सों से सैन्य टुकड़ियों को तुरंत गतिशीलता प्रदान करने में रणनीतिक लाभ मिला। 4. विद्रोहियों के पास हथियारों और गोला-बारूद की कोई कमी नहीं थी, किंतु अंग्रेजों द्वारा युद्ध के दौरान आधुनिक तोपखाने और वैज्ञानिक सैन्य रणनीति का उपयोग न किए जाने के कारण अंततः भारतीय सेनाओं को हार का सामना करना पड़ा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के नेतृत्व, ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष और उसके उपरांत नाना साहब, तात्या टोपे तथा अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह की शुरुआत हुई, जहाँ नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार तथा रणनीतिकार के रूप में कार्य कर रहे थे। 2. नाना साहब के नेतृत्व में विद्रोहियों ने कानपुर में फंसी ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, जिसके उपरांत सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) के आश्वासन के समय घटी 'सतीचौरा घाट घटना' में ब्रिटिश नागरिकों की सामूहिक हिंसा हुई। 3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य बल के साथ कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके बाद तात्या टोपे ने ग्वालियर की सेना के साथ मिलकर कानपुर को वापस जीतने के लिए भीषण प्रयास किया, जिसे 'द्वितीय कानपुर का युद्ध' कहा जाता है। 4. कानपुर के पतन के पश्चात नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि अजीमुल्ला खां ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें आजीवन काले पानी की सजा देकर अंडमान भेज दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? शिवाजी महाराज की युद्ध नीति मुख्य रूप से किस पर आधारित थी?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.