त्वरित लिंक्स
History of India
21 views
मुगल काल में "दाम":
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दाम तांबे का सिक्का था।
Related Questions
→
गुप्त साम्राज्य (जिसे भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है) की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त प्रशासन में विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ उच्च प्रशासनिक पदों पर आसीन अधिकारियों (जैसे कुमारमात्य) को प्रायः नगद वेतन के स्थान पर भू-राजस्व के अधिकार दिए जाते थे और 'उपरिक' नामक अधिकारी भुक्ति (प्रांत) का प्रमुख होता था।
2. इस काल में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रोमन साम्राज्य के साथ पतन के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया (सुवर्णद्वीप) के साथ समुद्री व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, और ताम्रलिपि तथा भृगुकच्छ (बरूच) इस काल के प्रमुख बंदरगाह थे।
3. गुप्तकालीन कला और वास्तुकला में पहली बार पक्की ईंटों और प्रस्तर के साथ मंदिर निर्माण की स्थायी शैली (जैसे नागर शैली) का विकास हुआ, जिसमें देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भूमरा का शिव मंदिर इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल तथा मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और लखनऊ में रेजिडेंसी की घेराबंदी तथा विद्रोही अभियानों का राजनीतिक व प्रशासनिक नेतृत्व किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने रोहिलखंड और अवध की सीमाओं पर अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद से अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का आह्वान किया था और ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी या हत्या पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था।
3. लखनऊ पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट की सहायता से सैन्य अभियान चलाया, और अंततः मार्च 1858 में शहर पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया, जिसके उपरांत बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें कलकत्ता में नजरबंद कर दिया गया।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह अंततः पवयां (Powayan) के राजा जगन्नाथ सिंह के यहाँ शरण लेने गए थे, जहाँ राजा के भाई द्वारा किए गए विश्वासघात के कारण वे मारे गए और अंग्रेजों ने उनके सिर को काटकर एक सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणालियों और छत्रपति शिवाजी महाराज की नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने प्रशासनिक सुधारों के तहत दक्कन के सुल्तानों और मलिक अंबर की भू-राजस्व प्रणाली को आधार बनाते हुए भूमि की पैमाइश करवाई, जिसमें उत्तम और मध्यम भूमि के आधार पर कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत राज्य के हिस्से के रूप में निर्धारित किया गया था।
2. 'चौथ' मराठा साम्राज्य के स्वराज्य (प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले क्षेत्र) से वसूला जाने वाला मुख्य भू-राजस्व कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' उस बाहरी क्षेत्र से वसूला जाता था जहाँ मराठों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था बल्कि वे उसकी सुरक्षा (पड़ोसी राज्यों के आक्रमणों से बचाव) का आश्वासन देते थे।
3. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, किंतु ये पद वंशानुगत नहीं थे और इसमें 'पंडितराव' तथा 'न्यायाधीश' को छोड़कर अधिकांश मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
4. शिवाजी की सेना में घुड़सवार सेना (पगा और बारगीर) और पैदल सेना (मावळे) के साथ-साथ एक सुदृढ़ नौसेना (Navy) का भी गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी तट पर सिडियों, पुर्तगालियों और अन्य यूरोपीय ताकतों के विरुद्ध समुद्री व्यापार की रक्षा करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या आयन-ए-दहसाला) व्यवस्था के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था, जिसमें 'जबत' प्रणाली का भी महत्वपूर्ण योगदान था।
2. शाहजहां के शासनकाल में कृषि भूमि के वर्गीकरण और लगान निर्धारण के लिए 'नस्क' या 'कंकूट' प्रणाली के अलावा 'हफ््ता' (सात वर्षों) और 'चहसाला' (चार वर्षों) जैसी पद्धतियों का भी प्रयोग किया जाने लगा था।
3. जहांगीर के काल में जागीरदारी संकट और मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो और तीन घोड़े) की नई व्यवस्था शुरू की गई थी, जिसके तहत बिना मनसब बढ़ाए ही घुड़सवार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी।
4. औरंगजेब द्वारा जारी किए गए 'महासब' और 'अहकाम-ए-आलमगिरी' जैसे फरमानों में यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि कृषि योग्य बंजर भूमि (बंजर और पड़ोस) को पुनः जोतने वाले किसानों से शुरुआत में भारी लगान वसूला जाए और उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय रियायत न दी जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण और घोड़े दागने (दाग) तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा शुरू करने के साथ-साथ बाजार नियंत्रण प्रणाली (मूल्य नियंत्रण) लागू की थी, जिसके लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
2. गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना के पश्चात अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की कठोर राजस्व नीतियों को उदार बनाते हुए 'हक्कीय-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) को पूरी तरह समाप्त कर दिया और कृषि के विकास के लिए कुओं व नहरों के निर्माण को प्रोत्साहित किया।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में तांबे और कांसे के सिक्कों के प्रचलन (सांकेतिक मुद्रा) के निर्णय को समकालीन इतिहासकार बदायुनी ने 'मूर्खतापूर्ण प्रयोग' कहा, क्योंकि साम्राज्य में व्यापक स्तर पर जाली सिक्कों की ढलाई होने लगी थी और लोग अपने पुराने चांदी व सोने के सिक्के जमा करने लगे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.