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History of India
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मुगल काल में "परगना" का अधिकारी:

Detailed Explanation

शिक्दार प्रशासनिक प्रमुख था।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान और उसके पश्चात आयोजित गोलमेज सम्मेलनों तथा गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते (1931) के तहत कांग्रेस ने 'हिंसात्मक अपराधों' के आरोपियों को छोड़कर शेष सभी राजनीतिक बंदियों की तत्काल रिहाई और सरकारी नौकरियों से त्यागपत्र देने वालों को बहाल करने की मांग मनवा ली थी, साथ ही समुद्र तट के पास नमक बनाने का अधिकार भी स्वीकार कर लिया गया था। 2. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था और उन्होंने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorates) की मांग पर दृढ़ता से पक्ष रखा था, जिसे महात्मा गांधी ने दलितों के सामाजिक-राजनीतिक उत्थान के लिए आवश्यक मानते हुए तुरंत स्वीकार कर लिया था। 3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद और ब्रिटिश सरकार की अनुदार नीतियों के कारण यह सम्मेलन पूरी तरह असफल रहा और गांधीजी को खाली हाथ भारत लौटना पड़ा था। 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन का कांग्रेस द्वारा पूरी तरह बहिष्कार किया गया था, और इस सम्मेलन में हुई संस्तुति के आधार पर ही बाद में 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' का निर्माण किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के सूफी संतों और उनके सिलसिलों (संप्रदायों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने संगीत (समां) को ईश्वर की प्राप्ति का साधन माना तथा राजकीय संरक्षण और शाही दरबारों से दूरी बनाए रखी। 2. सुहरावर्दी सिलसिला मुख्य रूप से मुल्तान और सिंध के क्षेत्रों में अधिक प्रभावशाली था, और इस सिलसिले के संतों (जैसे बहाउद्दीन जकारिया) ने राज्य से किसी प्रकार का अनुदान या वित्तीय सहायता लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया था तथा पूरी तरह वैराग्य जीवन अपनाया था। 3. कादिरिया सिलसिले की स्थापना भारत में शाह नेमतुल्लाह द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत मियांदिर थे, जिन्हें मुगल राजकुमार दारा शिकोह का आध्यात्मिक गुरु माना जाता है। 4. नक्शबंदी सिलसिला रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जाना जाता था, जिसके प्रमुख संत ख्वाजा बाकी بالله और शेख अहमद सरहिंदी थे, जिन्होंने अकबर की 'दीन-ए-इलाही' और धार्मिक उदारवादी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1857 के विद्रोह के दौरान अधिकांश भारतीय रियासतों और बड़े जमींदारों ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोही सैनिकों का खुलकर समर्थन किया, जिसके कारण अंग्रेजों को प्रशासनिक और सैन्य मोर्चे पर भारी कूटनीतिक पराजय का सामना करना पड़ा। 2. विद्रोही नेताओं के पास न तो कोई सुनियोजित केंद्रीय राजनीतिक दृष्टिकोण था और न ही आधुनिक युद्ध-कौशल, संचार साधनों और एक एकीकृत सैन्य कमान का अभाव इस विद्रोह की असफलता का एक प्रमुख कारण बना। 3. शिक्षित भारतीय मध्यम वर्ग, बुद्धिजीवियों और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त लोगों ने देश की स्वतंत्रता की स्पष्ट दूरदृष्टि के अभाव और रूढ़िवादी ताकतों के प्रभुत्व के कारण इस विद्रोह से दूरी बनाए रखी। 4. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, युद्ध सामग्री और वित्तीय संसाधनों की भारी कमी थी, जबकि ब्रिटिश सेना के पास औद्योगिक क्रांति से उपजे आधुनिक अस्त्र-शस्त्र, रेल और टेलीग्राम जैसी उन्नत संचार प्रणालियाँ मौजूद थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर दक्षिण भारत में स्थित था। 2. मगध साम्राज्य के शुरुआती उत्थान में हर्रक राजवंश के शासक बिम्बिसार ने कूटनीतिक विवाह संबंधों और विजय नीतियों का सहारा लिया, और उसने अंग महाजनपद को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था तथा अपने राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) को बनाया था। 3. अजातशत्रु के शासनकाल में वैशाली के वज्जि संघ को पराजित करने के लिए वर्षार्सु (वर्षकार) नामक मंत्री को कूटनीति के तहत भेजा गया था, और उसी के शासनकाल में मगध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाटलिग्राम में एक नए सैन्य किले का निर्माण किया गया था जो आगे चलकर पाटलिपुत्र के रूप में उभरा। 4. शिशुनाग राजवंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती महाजनपद को जीतकर मगध साम्राज्य में मिला लिया और मगध की शत्रुता को समाप्त करने के लिए अपनी राजधानी को पाटलिपुत्र से हटाकर पुनः राजगृह स्थानांतरित कर दिया था, जिसे बाद में उसके उत्तराधिकारी काकवर्ण (कालाशोक) ने वापस पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अंग्रेजी राजदूत सर थॉमस रो और कैप्टन हॉकिन्स किसके दरबार में व्यापारिक अनुमति लेने आए थे?
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