त्वरित लिंक्स
History of India
18 views
दीवान-ए-आम:
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जनता के लिए दरबार।
Related Questions
→
वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसे 'कृष्ण अयस' कहा जाता था, जिसके प्रयोग से उन्होंने उत्तर भारत के जंगलों को साफ करके कृषि योग्य भूमि का विस्तार किया था।
2. उत्तर वैदिक काल में 'गोत्र' प्रथा की स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ 'वह स्थान जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन पाला जाता था' था, और इस काल में अंतरगोत्रीय विवाह (सगोत्र विवाह) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।
3. ऋग्वैदिक समाज मूल रूप से कबीलाई और समतावादी था, जिसमें वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित न होकर कर्म और व्यवसाय पर आधारित थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में यह कठोरता से जन्म आधारित हो गई।
4. वैदिक साहित्य में संहिताओं (वेद) के अलावा ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों और उपनिषदों को शामिल किया जाता है, जिनमें 'उपनिषद' को 'वेदांत' भी कहा जाता है क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं और इनका मुख्य जोर दार्शनिक चिंतन तथा ज्ञान मार्ग पर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया, साथ ही उसने बाजार नियंत्रण नीति के तहत खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं के मूल्य कड़ाई से निर्धारित किए थे।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने सल्तनत काल में 'दीवान-ए-कोही' नामक एक पृथक् कृषि विभाग की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोआब क्षेत्र में कृषि सुधार करना और किसानों को तक्कोवी (अटवी) ऋण प्रदान करना था।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सर्वाधिक संख्या में नहरों का निर्माण करवाया और शरिया नियमों के विरुद्ध जाकर सिंचाई कर ('हक-ए-शर्ब') को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
4. सिकंदर लोदी ने भूमि की पैमाइश के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया, जो कृषि योग्य भूमि के माप के लिए एक मानक पैमाना बन गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करते हुए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया, जिसे बाद में बलबन ने अपनी केंद्रीय सत्ता को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से समाप्त कर दिया था।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की सख्त प्रणाली लागू की, साथ ही साम्राज्य में आर्थिक नियंत्रण के लिए बाजार नियंत्रण नीति के तहत 'दीوان-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की।
3. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित किया और सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलवाए, जिनका मूल्य सोने और चांदी के सिक्कों के बराबर रखा गया, जिससे अर्थव्यवस्था में व्यापक जाली मुद्रा का चलन बढ़ गया।
4. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सर्वाधिक नहरों का निर्माण करवाया तथा बेरोजगारों के लिए 'दीवान-ए-खैरात' और दासों की देखरेख के लिए 'दीवान-ए-बदगां' नामक नए विभागों की स्थापना की, किंतु उसने इक्ता प्रथा को वंशानुगत बना दिया जिससे प्रशासनिक शिथिलता आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और भू-राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' पूरी तरह से वंशानुगत थी, जिसमें मनसबदार का पद उसके ज्येष्ठ पुत्र को ही स्वतः प्राप्त होता था और जात एवं सवार का निर्धारण उसके व्यक्तिगत घोड़े की नस्ल के आधार पर किया जाता था।
2. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'सिंहोस्पा' (दो-अस्पा-सिंह-अस्पा) जैसी नई उप-श्रेणियाँ जोड़ी गईं, जिसके तहत बिना जात रैंक बढ़ाए ही सवार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी।
3. राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके औसत बाजार मूल्य का सर्वेक्षण कर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था।
4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में जागीरदारी संकट (Jagirdari Crisis) और किसानों के भारी विद्रोह के कारण उत्पन्न आर्थिक अस्थिरता के परिणामस्वरूप जागीर की कमी (बेजागीरी) की समस्या गंभीर हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का सफलतापूर्वक संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के लाइटहाउस' के रूप में भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना की दमनकारी नीतियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया और जीवनपर्यंत कलकत्ता में नजरबंद रहीं, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों से भयभीत होकर ब्रिटिश प्रशासन ने उनके ऊपर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.