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UPTET
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय संविधान के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है, जिसके दायरे में विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) भी शामिल हैं।
- 2. 'निःशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act 2016) के अनुसार दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है, तथा सरकारी और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में कम से कम 5% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
- 3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 'समग्र शिक्षा' (Samagra Shiksha) अभियान के तहत रिसोर्स रूम, विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और 'ग्रुप लर्निंग' पर विशेष बल दिया गया है, ताकि उनका मुख्यधारा की शिक्षा में पूर्ण समावेश हो सके।
- 4. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में केवल शारीरिक रूप से अक्षम बालकों को प्रवेश देना है, जबकि गंभीर मानसिक अक्षमता वाले बालकों के लिए केवल विशिष्ट (Special) विद्यालयों का होना ही अनिवार्य माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A (86वां संविधान संशोधन, 2002) सभी 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार देता है, जिसमें दिव्यांग बच्चे भी शामिल हैं। 'निःशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act) के तहत दिव्यांगता की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 किया गया और उच्च शिक्षण संस्थानों में 5% आरक्षण का प्रावधान है। NEP 2020 और समग्र शिक्षा अभियान समावेशी संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की विविध आवश्यकताओं वाले बालकों को सामान्य विद्यालयों में बिना किसी भेदभाव के एक साथ शिक्षा देना है, न कि गंभीर रूप से अक्षम बच्चों को केवल विशिष्ट विद्यालयों तक सीमित रखना।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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