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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय इतिहास के संदर्भ में, 'बुंदेलखंड नीस' (Bundelkhand Gneiss) और प्राचीनतम चट्टानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बुंदेलखंड का पठारी क्षेत्र भारतीय प्रायद्वीप का ही एक उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जहाँ उत्तर प्रदेश की सबसे प्राचीन 'आर्कियन' (Archaean) युग की ग्रेनाइट और नीस चट्टानें पाई जाती हैं।
  2. 2. इन प्राचीन चट्टानों पर समय के साथ हुए लंबे अपरदन और विरंजन के कारण यहाँ की मिट्टी मुख्य रूप से लाल और पीली मृदा में परिवर्तित हो गई है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और ह्यूमस की अत्यधिक प्रचुरता होती है।
  3. 3. बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ (जैसे बेतवा, केन, धसान और चंबल) इस पठारी भाग पर प्राचीन भूगर्भीय संरचनाओं को काटते हुए 'गॉर्ज' (Gorge) और तीव्र ढाल वाले झरने बनाती हैं।
  4. 4. इस क्षेत्र में मिलने वाली ग्रेनाइट चट्टानों का रंग मुख्य रूप से गुलाबी, लाल और धूसर होता है, जिनका उपयोग भवन निर्माण सामग्री और गिट्टी के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बुंदेलखंड का पठारी क्षेत्र गोंडवाना लैंड यानी भारतीय प्रायद्वीप का हिस्सा है और यहाँ 'आर्कियन' युग की सबसे प्राचीन ग्रेनाइट व नीस चट्टानें मिलती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि यहाँ की लाल-पीली व मार-काबर मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और ह्यूमस की भारी कमी होती है, हालांकि इसमें आयरन ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि बेतवा, केन और चंबल नदियाँ पठारी धरातल को काटकर गहरे गॉर्ज और जलप्रपात बनाती हैं। कथन 4 सही है क्योंकि इस क्षेत्र की ग्रेनाइट चट्टानों का रंग गुलाबी व लाल होता है और इनका खनन भवन निर्माण सामग्री (गिट्टी/पत्थर) के लिए किया जाता है। अतः विकल्प (a) सही है।
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