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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय संरचना के अंतर्गत 'बुंदेलखंड पठार' की मुख्य विशेषताओं और वहाँ की मृदा प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बुंदेलखंड का पठार उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित एक प्राचीन क्रिस्टलीय पठार है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से प्री-कैंब्रियन युग की 'ग्रेनाइट' और 'नीस' चट्टानों के अपक्षय से हुआ है।
- 2. इस क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदा को स्थानीय रूप से 'मार', 'परवा', 'राँड़' और 'कबर' के नाम से जाना जाता है, जिसमें 'मार' मृदा चिकनी और अत्यधिक उपजाऊ काली मिट्टी जैसी होती है, जबकि 'परवा' मृदा हल्की और रेतीली-दोमट होती है।
- 3. बुंदेलखंड क्षेत्र में वार्षिक वर्षा राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम (औसतन 80 सेमी से भी कम) होती है, जिसके कारण यहाँ की कृषि मुख्य रूप से खरीफ की फसलों पर निर्भर है और रबी के मौसम में यहाँ कोई कृषि कार्य नहीं किया जाता है।
- 4. इस पठारी क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ (जैसे चंबल, बेतवा, केन और टोंस) उत्तर की ओर बहते हुए यमुना नदी में मिलती हैं और अपने मार्ग में गहरे कंदराओं (Ravines) का निर्माण करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बुंदेलखंड का पठार उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है और यह प्राचीन प्री-कैंब्रियन युग की ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों से निर्मित है। कथन 2 सही है क्योंकि बुंदेलखंड क्षेत्र की स्थानीय मृदाओं में 'मार' (चिकनी, उपजाऊ, काली जैसी मृदा) और 'परवा' (हल्की दोमट मृदा) प्रमुख हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि बुंदेलखंड में कम वर्षा के बावजूद रबी के मौसम में भी फसलें (जैसे चना, मटर, सरसों और गेहूँ की कुछ किस्में) उगाई जाती हैं, और सिंचाई के लिए तालाबों, नेहरों व भूजल का उपयोग किया जाता है। कथन 4 सही है क्योंकि इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ (चंबल, बेतवा, केन आदि) यमुना की सहायक नदियाँ हैं और मृदा अपरदन के कारण यहाँ बड़े पैमाने पर बीहड़ों (Ravines) का निर्माण हुआ है। अतः विकल्प (a) सही है।
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजन, जलवायु और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को भारत के योजना आयोग द्वारा कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो राज्य की विभिन्न भौगोलिक और मिट्टी की विशेषताओं को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित भूमि का प्रतिशत सबसे अधिक है और यहाँ नलकूप (Tube Wells) सिंचाई का प्रमुख साधन हैं, जबकि इस क्षेत्र में गन्ने का उत्पादन सबसे प्रमुख है।
3. राज्य के दक्षिणी पठारी क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ और जल-धारण क्षमता वाली लाल मिट्टी के प्रकार हैं, जो विशेष रूप से चाय और रबर के बागानों के लिए उपयुक्त हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों, पक्षी विहारों और उनकी स्थापना तथा अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार - चंदौली जिला (यह उत्तर प्रदेश का सबसे पहला वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1957 में की गई थी।)
2. नवाबगंज पक्षी विहार (वर्तमान नाम: चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार) - उन्नाव जिला (यह राज्य का सबसे पहला पक्षी विहार है, जिसकी स्थापना वर्ष 1984 में हुई थी।)
3. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान - लखीमपुर खीरी जिला (इसे वर्ष 1977 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में और वर्ष 1983 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था।)
4. ओखला पक्षी विहार - गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद की सीमा पर (यह यमुना नदी के तट पर स्थित है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है।)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा और विचार (Language and Thought)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) और लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के भाषा विकास मॉडलों के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area - उत्पादक भाषा), 'वेर्निके क्षेत्र' (Wernicke's Area - भाषा समझ), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC - कार्यकारी नियंत्रण) के बीच सिमेंटिक मैपिंग (Semantic Mapping), आंतरिक वाक् नियमन (Internal Speech Regulation), और वैचारिक अमूर्तन (Conceptual Abstraction) की सक्रियण गतिकी, तथा नोआम चॉम्स्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अधिग्रहण यंत्र' (Language Acquisition Device - LAD) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सोशियो-लिंग्विस्टिक कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Socio-Linguistic Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक स्वनिर्देशन (Cognitive Self-Direction), भाषाई प्रवाह व समग्र वैचारिक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व के शील गुण सिद्धांत' (Trait Theory of Personality) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हंस आइजेंक (Hans Eysenck) द्वारा प्रतिपादित 'त्रि-आयामी व्यक्तित्व मॉडल' (PEN Model: Psychoticism, Extraversion, and Neuroticism) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'असेंडिंग रेटिकुलॉर एक्टिवेटिंग सिस्टम' (ARAS), 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System - विशेष रूप से अमिकडाला और हिप्पोकैम्पस), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच कॉर्टिकल उत्तेजना (Cortical Arousal), autonomic emotional reactivity, और डोपामिनर्जिक-सेरोटोनर्जिक न्यूरोट्रांसमिशन की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट मैक्रे और पॉल कोस्टा (McCrae and Costa) के 'पंच-कारक मॉडल' (Big Five Personality Traits: Openness, Conscientiousness, Extraversion, Agreeableness, and Neuroticism) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-पर्सनालिटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Personality Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-संकल्प, भावनात्मक संतुलन, व्यवहार नियंत्रण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था' की अवधि निम्नलिखित में से क्या है?
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