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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश का भू-भाग मूल रूप से प्राचीन 'गोंडवाना लैंड' का ही एक उत्तरी विस्तार है, जिसके अंतर्गत दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र) की चट्टानें आर्कियन और प्रिएम्बियन युग की हैं।
- 2. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना मैदान का निर्माण मुख्य रूप से टरटियरी (Tertiary) और क्वाटर्नरी (Quaternary) कल्प में हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ (Alluvial) मिट्टियों के निक्षेपण से हुआ है।
- 3. उत्तर प्रदेश के बिजनौर, सहारनपुर और मुरादाबाद जिलों में मिलने वाली 'भाबर' (Bhabar) पेटी कंकड़-पत्थरों और मोटे बालू से निर्मित होने के कारण अत्यधिक उपजाऊ होती है, जहाँ नदियां सतह पर स्पष्ट रूप से बहती हैं।
- 4. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र में मिलने वाली 'पारा' और 'मार' नदियां मुख्य रूप से चंबल नदी की सहायक नदियां हैं जो इस क्षेत्र में नालिका अपरदन (Gully Erosion) के लिए उत्तरदायी हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि उत्तर प्रदेश का दक्षिणी पठारी क्षेत्र और प्रायद्वीपीय हिस्सा प्राचीन गोंडवाना लैंड का उत्तरward विस्तार है। कथन 2 सही है क्योंकि विशाल मैदानी भाग का निर्माण टरटियरी और क्वाटर्नरी काल में जलोढ़ निक्षेपों द्वारा हुआ है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'भाबर' पेटी कंकड़-पत्थरों और मोटे अवसादों से निर्मित होने के कारण कृषि के लिए कम उपजाऊ होती है और इसमें नदियां धरातल के नीचे विलुप्त हो जाती हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि 'पारा' या 'मार' मृदा के प्रकार हैं, न कि चंबल की सहायक नदियां (चंबल के बीहड़ों के लिए यमुना और उसकी सहायक नदियां जैसे चंबल, सिंध, बेतवा, केन उत्तरदायी हैं)। अतः सही विकल्प (a) है।
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों और मिट्टी के स्थानीय नामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की मृदा भिन्नता, तापमान और वर्षा वितरण पर आधारित हैं।
2. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ काली या चिकनी मिट्टी होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है और ये रबी फसलों के लिए उत्तम मानी जाती हैं।
3. राज्य के पश्चिमी और मध्यवर्ती मैदानी जिलों में अत्यधिक सिंचाई तथा खराब जल-निकास के कारण उपजाऊ जलोढ़ मृदा क्षारीय और लवणीय हो जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'उसर' या 'रेह' कहा जाता है, और इसके सुधार के लिए फास्फोरस का प्रयोग किया जाता है।
4. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदा मुख्य रूप से महीन कणों वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी होती है, जो घने जंगलों और लंबी घास से ढकी रहती है तथा यहाँ धान और गन्ने की बंपर पैदावार होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ हैं?
1. 'जीववाद' (Animism) की प्रवृत्ति, जिसके अंतर्गत बच्चा निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौने, गुड़िया या पत्थर) को सजीव मानता है और यह सोचता है कि वे भी महसूस कर सकती हैं, बोल सकती हैं या जीवित हैं।
2. 'अहंप्रतिपत्ति / अहंप्रेंद्रीकरण' (Egocentrism), जिसके कारण बच्चा यह मान लेता है कि दूसरे व्यक्ति उसके अपने दृष्टिकोण, विचारों और अनुभवों को ही देख रहे हैं और दुनिया को ठीक वैसे ही अनुभव करते हैं जैसे वह करता है।
3. 'संरक्षण' (Conservation) और 'पलटावी' (Reversibility) की क्षमता का पूर्ण विकास, जिससे बच्चा यह समझ जाता है कि किसी वस्तु का आकार बदलने पर उसकी मात्रा अपरिवर्तित रहती है और किसी प्रक्रिया को उल्टी दिशा में भी सोचा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था' की अवधि क्या है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु क्षेत्रों के संदर्भ में, राज्य की मृदा प्रणालियों और उनकी विशेषताओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना में 'भाभर' क्षेत्र की मिट्टी अत्यंत कंकरीली, पथरीली और छिद्रयुक्त होती है, जिसके कारण नियाँ इस क्षेत्र में विलुप्त हो जाती हैं और कृषि की दृष्टि से यह क्षेत्र अनुपयुक्त होता है।
2. 'तराई' क्षेत्र भाभर के दक्षिण में स्थित एक संकीर्ण नम एवं दलदली पेटी है, जहाँ घने जंगल और लंबी घासें पाई जाती हैं, तथा हाल के दशकों में वनों की कटाई के बाद इस क्षेत्र में धान और गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाने लगी है।
3. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी (बुंदेलखंड) क्षेत्र में पाई जाने वाली 'राकर' (या राँड़) मिट्टी ढलान वाले और कंकरीले भागों पर मिलती है, जो कम उपजाऊ होती है और क्षरण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है।
4. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली 'भूड़' मृदा मूल रूप से एक प्रकार की उपजाऊ जलोढ़ दोमट मिट्टी है, जो गेहूँ और आलू के उत्पादन के लिए पूरे राज्य में सर्वोच्च स्थान रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के संचालन और क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) द्वारा प्रतिपादित 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'न्यूक्लियस एकुम्बेंस' (Nucleus Accumbens), 'वेंट्रलग्रूप डोपामाइनर्जिक पाथवे' (Mesolimbic Dopamine Pathway) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच पुरस्कार प्रत्याशा (Reward Anticipation), आदत निर्माण और लक्ष्य-निर्देशित प्रतिक्रिया नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सकारात्मक सुदृढ़ीकरण शिक्षाशास्त्र (Positive Reinforcement Pedagogy) और विद्यार्थियों में अनु adaptive व्यवहार, सतत प्रेरणा व समग्र अनुक्रियाशीलता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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