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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश को योजना आयोग द्वारा कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की मृदा प्रकार, वर्षा की मात्रा और तापमान भिन्नता पर आधारित हैं।
  2. 2. 'भाबर और तराई क्षेत्र' के अंतर्गत आने वाले जिलों में धान और गन्ने की खेती अत्यधिक मात्रा में की जाती है, क्योंकि यहाँ की मृदा में नमी की पर्याप्त मात्रा और भू-जल स्तर ऊँचा होता है।
  3. 3. 'बुंदेलखंड कृषि-जलवायु क्षेत्र' के अंतर्गत लाल मृदा (Red Soil), परवा और मार मिट्टियाँ पाई जाती हैं, जहाँ सिंचाई के साधनों की सीमित उपलब्धता के कारण मुख्यतः चना, मटर और ज्वार जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें उगाई जाती हैं।
  4. 4. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (Western Plain Zone) में गेहूं और गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन होता है, और यह क्षेत्र देश में हरित क्रांति के सबसे पहले और सर्वाधिक सफल प्रयोग वाले क्षेत्रों में से एक रहा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन उत्तर प्रदेश के भौगोलिक और कृषि-जलवायु संदर्भ में पूर्ण रूप से सत्य हैं। 1) योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है। 2) भाबर और तराई क्षेत्र में अधिक वर्षा और नमी के कारण धान और गन्ना प्रमुख फसलें हैं। 3) बुंदेलखंड क्षेत्र में कम सिंचाई के कारण दलहन (चना, मटर) और मोटे अनाज (ज्वार) की खेती प्रमुखता से होती है। 4) पश्चिमी मैदानी क्षेत्र गेहूं और गन्ने के उत्पादन में अग्रणी है और हरित क्रांति का प्रमुख केंद्र रहा है।
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