BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
9 views

बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों और उनकी अंतर्दृष्टि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'विकास की दिशा का सिद्धांत' (Principle of Directional Trend) यह बताता है कि विकास हमेशा सिर से पैर की ओर ('मस्तकोधुमुखी' या Cephalocaudal) तथा शरीर के केंद्र से बाहर की ओर ('निकट-दूर' या Proximodistal) दोनों दिशाओं में अग्रसर होता है।
  2. 2. 'समान प्रतिमान का सिद्धांत' (Principle of Uniform Pattern) के अनुसार, मानव जाति के सभी शिशु अपने विकास के क्रम में एक निश्चित और सार्वभौमिक पैटर्न का पालन करते हैं, भले ही व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण विकास की गति में अंतर हो सकता है।
  3. 3. 'परस्पर संबंध का सिद्धांत' (Principle of Interrelation) यह स्पष्ट करता है कि शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक विकास एक-दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं और किसी एक क्षेत्र में होने वाला परिवर्तन अन्य क्षेत्रों को प्रभावित नहीं करता है।
  4. 4. 'संचलनात्मक से विशिष्ट प्रतिक्रियाओं का सिद्धांत' (Principle of General to Specific Responses) यह इंगित करता है कि बालक सबसे पहले सामान्य प्रतिक्रियाएँ (जैसे पूरे हाथ को हिलाना) करना सीखता है और उसके बाद विशिष्ट प्रतिक्रियाएँ (जैसे उंगलियों से किसी वस्तु को उठाना) सीखता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि विकास की दिशा मस्तकोधुमुखी (Cephalocaudal) और निकट-दूर (Proximodistal) होती है। कथन 2 सही है क्योंकि सभी मानव बच्चे एक समान विकासात्मक प्रतिमान का अनुसरण करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि विकास के विभिन्न पहलू (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक आदि) एक-दूसरे से स्वतंत्र नहीं होते, बल्कि आपस में घनिष्ठ रूप से संबंधित और अंतर्निर्भर होते हैं (एक क्षेत्र का विकास दूसरे को प्रभावित करता है)। कथन 4 सही है क्योंकि विकास हमेशा सामान्य से विशिष्ट (General to Specific) की ओर चलता है। अतः केवल 1, 2 और 4 कथन सही हैं।
Share:

Related Questions

→ बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है। 2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। 3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं आर्थिक संदर्भ में, राज्य के तराई क्षेत्र (Terai Region) की प्रमुख विशेषता क्या है और यहाँ किस प्रकार की मृदा एवं कृषि की प्रधानता पाई जाती है? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और विकासात्मक विकारों के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक आकलन' के संदर्भ में, 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia) और 'डिस्कैलकुलिया' (Dyscalculia) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के सुपीरियर पैराइटल लोब' (Superior Parietal Lobe) और 'एंगुलर गायरस' (Angular Gyrus) की स्थानिक-संख्यात्मक एकीकरण तथा दृश्य-मोटर समन्वय विफलता की प्रक्रिया, तथा स्टेनिसलास डियाहेन (Stanislas Dehaene) द्वारा प्रतिपादित 'संख्यात्मक प्रसंकरण के ट्रिपल-कोड मॉडल' (Triple-Code Model of Numerical Processing) के अंतर्गत 'विजुअल नंबर फॉर्म', 'वर्बल ऑडिटरी वर्ड-फ्रेम', और 'एनालॉग मेन्टाल नंबर लाइन' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, उपचारात्मक गणितीय शिक्षण और विद्यार्थियों में संख्यात्मक बोध तथा ग्राफमोटर दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के सिद्धांत' (Theories of Intelligence) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences: भाषाई, तार्किक-गणितीय, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिसंवेदी, स्थानिक, अंतर्व्यक्तिगत, अंतराव्यक्तिगत और प्रकृतिवादी बुद्धि) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'टेम्पोरल लोब' (Temporal Lobe), 'पैराइटल लोब' (Parietal Lobe), 'सेरिबेलम' (Cerebellum), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच विशिष्ट डोमेन मॉड्यूलरिटी (Domain Modularity), न्यूरल प्रोसेसिंग मार्गों, और संज्ञानात्मक स्वायत्तता की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) के 'त्रित्त्व बुद्धि सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence: विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-इंटेलिजेंस ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Intelligence Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुआयामी प्रतिभा विकास, विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था और प्रशासनिक संरचना के संदर्भ में, राज्य में 'क्षेत्र पंचायत' के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) के निर्वाचन की प्रक्रिया और उसके अधिकार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.