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History of India
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शेरशाह सूरी ने पूरे साम्राज्य को कितनी "सरकार" (जिलों) में विभाजित किया था?

Detailed Explanation

शेरशाह का साम्राज्य लगभग 47 सरकारों में बंटा था।
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों, उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा उनके प्रारंभिक संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के 'सर्वास्तिवाद' संप्रదాయ के अनुसार सभी धर्म (तत्त्व) भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों में वास्तविक रूप से अस्तित्व रखते हैं, जबकि 'सौत्रान्तिक' संप्रదాయ बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को प्रत्यक्ष के बजाय केवल अनुमानगम्य मानता है। 2. जैन धर्म के 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' के सिद्धांत के अनुसार ज्ञान सापेक्ष और बहुआयामी होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी वस्तु के केवल एक एकांगी सत्य को ही पूर्ण सत्य के रूप में स्थापित करना है। 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा के अंतर्गत शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने प्रतीत्यसमुत्पाद को ही शून्यता का पर्याय माना है, जिसका अर्थ है कि सभी धर्म स्वसंभाव से रहित हैं। 4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के विपरीत दिगंबर संप्रदाय यह मानता है कि स्त्रियाँ अपने इसी शरीर के साथ मोक्ष प्राप्त करने की पूर्ण अधिकारिणी होती हैं और उन्हें तीर्थंकर बनने की भी अनुमति है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा पुनर्गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के मध्य वैचारिक एवं रणनीतिक संपर्कों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जेल में बंद था, तब उषा मेहता द्वारा संचालित 'भूमिगत कांग्रेस रेडियो' पर सुभाष चंद्र बोस की गुप्त रूप से प्रसारित होने वाली ओजस्वी आवाज को नियमित रूप से प्रसारित किया जाता था, जिससे देशवासियों में प्रतिरोध की भावना प्रबल हुई। 2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापान पहुँचने के पश्चात् 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की विचारधारा को त्याग दिया और आजाद हिंद फौज की कमान संभालते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। 3. आजाद हिंद फौज के अंतर्गत गठित 'रानी झांसी रेजीमेंट' पूरी तरह महिलाओं की एक लड़ाकू इकाई थी, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था और इस रेजीमेंट ने इम्फाल अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सैन्य सहभागिता की थी। 4. भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और कांग्रेस के भारत छोड़ो आंदोलन—दोनों का पूर्ण समर्थन किया क्योंकि वे इसे साम्राज्यवादी युद्ध के विरुद्ध अंतिम मुक्ति संघर्ष मानते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? औरंगजेब की मृत्यु 1707 ई. में कहाँ हुई थी? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के अन्य प्रमुख क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में घटित घटनाओं और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुजफ्फरपुर में विद्रोह के दौरान विद्रोही सिपाहियों ने वहाँ के अंग्रेज न्यायाधीश जॉन कमिश्नर की हत्या कर दी थी, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही गतिविधियों का संचालन किया गया था। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें देशी पैदल सेना (Native Infantry) के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर शाहाबाद क्षेत्र में बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए। 3. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के कठोर दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर फाँसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल में कन्नौज की सभा और प्रयाग की महामोक्षपरिषद का प्रमुख उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग को सम्मानित करना था, जहाँ हर्ष ने अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर दी थी। 2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण हमें महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' से प्राप्त होता है। 3. पल्लव राजा महेंद्रवमन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, तथा उन्होंने महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (Monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। 4. चोल प्रशासन की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) प्रणाली थी, जिसका जीवंत उदाहरण 'उत्तरेमरूर' (Uttaramerur) अभिलेखों से मिलता है, जिसमें ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए लॉटरी पद्धति (कुरावोई) का विस्तृत विवरण दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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