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उत्तर प्रदेश के लोक संगीत, नाट्य शैलियों और मेलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'ख्याल गायकी' और 'ध्रुपद गायकी' के विकास में उत्तर प्रदेश के किराना घराना, आगरा घराना और लखनऊ घराने का ऐतिहासिक योगदान रहा है, तथा बिंदादीन महाराज ने कथक नृत्य में ठुमरी गायकी के समावेश को लोकप्रिय बनाया था।
  2. 2. 'ढोला' लोकगीत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा और अलीगढ़ क्षेत्रों में अत्यधिक लोकप्रिय है, जिसे प्रायः दो गायकों द्वारा ढोलक और मंजीरे की थाप पर कथात्मक शैली में गाया जाता है।
  3. 3. 'नौटंकी' उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख लोक नाट्य शैली है, जिसके दो मुख्य घराने या शैलियाँ हाथरस शैली और कानपुर शैली हैं, जिनमें वीर रस, सामाजिक सुधार और पौराणिक कथाओं का मंचन किया जाता है।
  4. 4. उत्तर प्रदेश में लगने वाला 'बटेश्वर मेला' एक प्रसिद्ध पशु मेला है, जो आगरा जिले में यमुना नदी के तट पर आयोजित होता है, और यह मेला जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के तीर्थंकरों से भी जुड़ा हुआ है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन उत्तर प्रदेश की संस्कृति, लोक संगीत, लोक नाट्य और मेलों के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। 1. कथन 1 सत्य है: उत्तर प्रदेश शास्त्रीय संगीत (जैसे किराना, आगरा, लखनऊ घराने) और कथक के लिए प्रसिद्ध है। महान कथक नर्तक बिंदादीन महाराज ने कथक में ठुमरी शैली के प्रयोग को बढ़ावा दिया था। 2. कथन 2 सत्य है: 'ढोला' पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर आगरा, अलीगढ़, मेरठ आदि) का लोकप्रिय लोकगीत है जो वीर गाथाओं और प्रेम कथाओं पर आधारित होता है। 3. कथन 3 सत्य है: नौटंकी उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक लोकप्रिय लोक नाट्य है, जिसकी दो प्रमुख शैलियाँ 'हाथरस शैली' (संगीत प्रधान) और 'कानपुर शैली' (अभिनय प्रधान) हैं। 4. कथन 4 सत्य है: बटेश्वर मेला (आगरा) ऊँटों और अन्य पशुओं के क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध है तथा यहाँ कई ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित हैं जो धार्मिक महत्व रखते हैं।
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