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History of India
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अकबर का अंतिम सैन्य अभियान (1601 ई.) कौन सा था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
असीरगढ़ का घेरा अकबर का अंतिम युद्ध था।
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मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और अशोक के धम्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख तीर्थ (विभागाध्यक्ष) होते थे, जिनमें 'समाहर्त्ता' राजस्व संग्रह का मुख्य अधिकारी था, जबकि 'संनिधातृ' राजकोष और भण्डारगृह का मुख्य संरक्षक होता था।
2. अशोक के शिलालेखों में वर्णित 'धम्म' कोई नया धर्म या धार्मिक पंथ नहीं था, बल्कि यह समाज कल्याण, बड़ों का आदर, शिष्टाचार, अहिंसा और सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता पर आधारित एक नैतिक आचार संहिता थी, जिसके प्रचार के लिए उसने 'धम्ममहामात्र' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
3. मौर्य काल में राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली भूमि को 'सीता भूमि' कहा जाता था, जिस पर कृषि कार्य राजकीय कृषि अध्यक्ष (सीताध्यक्ष) की देखरेख में दासों, कर्मकारों और बंदियों द्वारा कराया जाता था।
4. अशोक के अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं, परंतु पश्चिमोत्तर सीमांत क्षेत्र के शाहबाजगढ़ी और मनसेहरा अभिलेखों में यूनानी और अरामैइक लिपियों का प्रयोग किया गया है, तथा तक्षशिला से मिले अभिलेख में केवल खरोष्ठी लिपि मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' की विभिन्न धाराओं, उनके दार्शनिक दृष्टिकोण और प्रमुख संतों के योगदान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के भक्ति आंदोलन में आलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने तमिल भाषा को अपने उपदेशों का माध्यम बनाया और जाति व्यवस्था के कठोर बंधनों को चुनौती देते हुए बौद्ध व जैन दर्शन का कड़ा विरोध किया था।
2. उत्तर भारत में रामभक्ति शाखा के प्रमुख संत रामानंद ने जाति और वर्णभेद को दरकिनार करते हुए शूद्रों तथा महिलाओं को भी अपने शिष्यों के रूप में दीक्षित किया था, और उनके बारह प्रमुख शिष्यों में रैदास, कबीर और पीपा शामिल थे।
3. सूफी संतों का 'चिश्ती सिलसिला' संगीत और 'समां' के माध्यम से ईश्वर की आराधना में विश्वास रखता था, जबकि भारत में इस सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, जिन्हें 'गरीब नवाज' के रूप में भी जाना जाता है।
4. सूफी संतों का 'सुहरावर्दी सिलसिला' राज्य के नियंत्रण और राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव की नीति का कड़ाई से पालन करता था, जिसके तहत वे सुल्तानों के दरबार में जाने और उनसे मिलने वाले किसी भी प्रकार के जागीर या उपहार को पूर्णतः अस्वीकार कर देते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्त काल तथा मौर्योत्तर काल के आर्थिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा बड़े पैमाने पर शुरू हुई, जिसमें राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, बौद्ध विहारों और प्रशासनिक अधिकारियों को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व न्यायिक अधिकार भी अनुदानग्राहियों को हस्तांतरित होने लगे।
2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) ने शीशे (Lead) के सिक्कों का सबसे बड़े पैमाने पर प्रचलन किया, तथा उनके अभिलेखों में भूमिदान के प्रारंभिक साक्ष्य मिलते हैं, किंतु उन्होंने बौद्ध संघों के स्थान पर केवल वैदिक ब्राह्मणों को ही भूमि दान में देने की परंपरा की शुरुआत की थी।
3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था, जो कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मकता प्रदर्शित करते थे, विशेष रूप से कुमारगुप्त प्रथम और स्कंदगुप्त के शासनकाल में स्वर्ण सिक्कों की मात्रा में भारी वृद्धि हुई।
4. फाह्यान (Fa-Hien), जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था, ने अपने यात्रा वृत्तांत में उल्लेख किया है कि इस काल में गंगा की घाटी में वैश्य और शूद्र वर्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी और उन्हें अछूत मानकर नगरों के बाहर बसाया जाने लगा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक उदारवादी (नरम दल) नेताओं का मुख्य विश्वास 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में था और उन्होंने औपनिवेशिक स्वराज (Colonial Self-Government) को संवैधानिक तरीकों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था, किंतु उन्होंने कभी भी ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण के सिद्धांत (Drain of Wealth) की खुली आलोचना नहीं की।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष—ने इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश में 'स्वदेशी', 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) और 'राष्ट्रीय शिक्षा' के रूप में फैलाने पर जोर दिया।
3. सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के मंच से गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस में ऐतिहासिक विभाजन हो गया और संगठन पर नरमपंथियों का नियंत्रण स्थापित हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मई 1857 के मध्य में मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने के बाद वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने इस नेतृत्व को तुरंत स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था और वे शुरू से ही इस विद्रोह के राजनीतिक और सैन्य संचालन के लिए पूरी तरह तत्पर थे।
2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और प्रशासनिक नियंत्रण जनरल बख्त खान के हाथों में था, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने प्रशासनिक मामलों के संचालन के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया था।
3. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने कड़ा संघर्ष किया, जिसके दौरान निकलसन गंभीर रूप से घायल हुए और मारे गए, जबकि जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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