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History of India
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अकबर के काल में निर्मित अधिकांश इमारतें किस पत्थर से बनी हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अकबर की अधिकांश इमारतें लाल बलुआ पत्थर की हैं।
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सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था और उसकी विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक तथा व्यापारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के किसी भी स्थल से किसी भी प्रकार के मंदिर या स्पष्ट धार्मिक पूजा-गृह के अवशेष प्राप्त नहीं हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि इस सभ्यता का शासन किसी पुरोहित वर्ग के हाथों में न होकर संभवतः व्यापारियों या वणिक वर्ग के हाथों में था।
2. बनावली से प्राप्त पकी हुई मिट्टी (टेराकोटा) का हल यह प्रमाणित करता है कि सिंधु घाटी के लोगों को कृषि के लिए हल का ज्ञान था, और यहाँ से जौ की एक उन्नत किस्म के साथ-साथ धान और बाजरे के साक्ष्य भी प्रचुर मात्रा में मिले हैं।
3. लोथल और चन्हूदड़ो दोनों ही स्थल मनके बनाने (Bead-making) के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ से कार्नेलियन, जैस्पर और शंख जैसी बहुमूल्य सामग्रियों से मनके तैयार किए जाते थे।
4. सिंधु सभ्यता की मोहरों पर सबसे अधिक अंकन 'कूबड़ वाले बैल' (Humped Bull) का मिलता है, जबकि लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी जो दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व एवं उनकी रणनीतिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में ब्रिटिश पेंशन और अधिकारों से वंचित किए जाने के अपने क्षोभ को प्रकट करते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध का बिगुल बजाया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और वफादार सहयोगी थे, ने विद्रोह के वैचारिक और कूटनीतिक पक्ष को संभालते हुए लंदन जाकर पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में अवध तथा अन्य रियासतों के साथ गुप्त संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
3. तात्या टोपे ने कानपुर की सुरक्षा और सैन्य संचालन का वास्तविक उत्तरदायित्व संभालते हुए ब्रिटिश जनरल कैंपबेल की सेना को कड़ी चुनौती दी, तथा नाना साहब की सेना के पतन के पश्चात ग्वालियर की ओर प्रस्थान कर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।
4. कानपुर में असफल होने के बाद नाना साहब अंग्रेजों के हाथों पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फाँसी दे दी गई, जबकि अजीमुल्ला खां युद्ध के दौरान ही वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक संरचना, वास्तुकला और ऐतिहासिक स्रोतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ह्वेनसांग के विवरण के अनुसार, हर्षवर्धन के शासनकाल में कन्नौज की सभा और प्रयाग के महामक्ष परिषद (कुंभ मेले का प्राचीन रूप) का आयोजन किया जाता था, जहाँ सम्राट अपनी संचित संपत्ति और आभूषण बौद्ध संघ, ब्राह्मणों और गरीबों में दान कर देते थे।
2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम द्वारा रचित संस्कृत नाटक 'मत्ताविलास प्रहसन' में बौद्ध और जैन भिक्षुओं पर व्यंग्य किया गया है, तथा उनके शासनकाल में महाबलीपुरम के रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू हुआ था।
3. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत उल्लेख कालिदास के प्रसिद्ध महाकाव्य 'रघुवंशम्' और एहोल प्रशस्ति (जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी) में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध करना था, जबकि 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने किसी भी धर्म के ग्रंथों को अचूक (Infallible) मानने से इंकार किया और सभी धर्मों की एकता पर बल दिया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया, किंतु उन्होंने वेदों को अपौरुषेय और अचूक मानने के साथ-साथ मूर्तिपूजा, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
3. केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा दिया, और इसके संस्थापकों में आत्माराम पांडुरंग तथा महादेव गोविंद रानाडे प्रमुख रूप से शामिल थे।
4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा धार्मिक पाखंडों से मुक्त समाज का निर्माण करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब (बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने संभाला, जिन्हें पेशवा घोषित किया गया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य कर रहे थे।
2. नाना साहब के सैनिकों ने कानपुर में सर ह्यू व्हीलर के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, किंतु 'सती चौरा घाट' की घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा बड़े पैमाने पर नरसंहार किए जाने के बाद नाना साहब और उनके सहयोगियों को अंग्रेजों के हाथों भारी पराजय का सामना करना पड़ा।
3. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सुरक्षा का कमान संभाला और ग्वालियर की विद्रोही सेना को अपने साथ मिलाकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने के लिए सर कॉलिन कैंपबेल की अंग्रेजी सेना के विरुद्ध भीषण संघर्ष किया।
4. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने नाना साहब के साथ नेपाल की तराई में शरण ले ली और आजीवन अंग्रेजों के हाथ नहीं आए, जबकि अजीमुल्ला खां को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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