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History of India
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टोडरमल द्वारा लागू की गई राजस्व प्रणाली को क्या कहा जाता था?

Detailed Explanation

इसे दहशाला या ज़ब्ती प्रणाली कहा गया।
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मुगल काल में "तबकात-ए-अकबरी" की रचना किसने की थी जिसे सबसे निष्पक्ष इतिहास माना जाता है? मुगल काल में "चहार चमन" (Chahar Chaman) के लेखक कौन थे जो शाहजहाँ के सचिव थे? पुर्तगाली यात्री "फर्नाओ नूनिज" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था? प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के गुण अनंतिम होते हैं, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (हेतुवाद) सिद्धांत के अनुसार समस्त ब्रह्मांड की वस्तुएं और घटनाएं परस्पर कारणों और प्रभावों की श्रृंखला से जुड़ी हुई हैं तथा कोई भी वस्तु स्वतंत्र या नित्य नहीं है। 2. महावीर स्वामी द्वारा जैन संघ की स्थापना पावापुरी में की गई थी, और उनकी मृत्यु (निर्वाण) के पश्चात जैन संघ का प्रथम थेर (अध्यक्ष) सुधर्मन बना था, क्योंकि उनके अन्य ग्यारह गणधरों में से केवल सुधर्मन ही महावीर के जीवनकाल और उनकी मृत्यु के समय जीवित बचे थे। 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' की परिकल्पना की गई है, जिन्हें संसार के उद्धार के लिए इस पृथ्वी पर आने वाले अंतिम बुद्ध के रूप में स्वीकार किया गया है, जबकि हीनयान (स्थविरवाद) संप्रदाय केवल सिद्धार्थ गौतम को ही एकमात्र बुद्ध मानता है। 4. जैन दर्शन में कर्म के बंधन से मुक्ति के लिए संथारा (या संलेखना) पद्धति का विधान है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी इच्छा से उपवास के माध्यम से शरीर का त्याग करता है, और इसी विधि के तहत मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने श्रवणबेलगोला में अपने प्राण त्यागे थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? गोलकुंडा के "कुतुबशाही वंश" की स्थापना किसने की थी?
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