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History of India
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विजयनगर में युद्ध के समय "वीर पंजाल" (Veer Panchala) का संबंध किस वर्ग से था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वीर पंजाल पांच प्रकार के शिल्पकारों (लोहार, सुनार, बढ़ई आदि) का समूह था।
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था और विभिन्न स्थलों से प्राप्त विशिष्ट पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चान्हूदो एकमात्र ऐसा सैंधव स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के गढ़ (Citadel) के अवशेष नहीं मिले हैं, और यह स्थल मुख्य रूप से मनके बनाने, सीप की कटाई तथा मुहर निर्माण जैसे शिल्प उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र था।
2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह स्थल फारस की खाड़ी और मेसोपोटामिया के साथ होने वाले समुद्री व्यापार का एक प्रमुख बंदरगाह था, जहाँ से फारस की मुहरें भी प्राप्त हुई हैं।
3. बनावली (हरियाणा) से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों में पक्की मिट्टी (Terracotta) से बने हल का एक प्रतिरूप मिला है, तथा इस स्थल की नगर योजना सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों की तरह पूरी तरह से ग्रिड पद्धति (Grid System) पर आधारित थी और यहाँ की जल निकासी व्यवस्था अत्यंत उन्नत थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और लखनऊ में ब्रिटिश रेजीडेंसी के खिलाफ हुए विद्रोह का नेतृत्व किया, तथा बाद में अंग्रेजों द्वारा पराजित होने के बाद नेपाल शरण लेने चली गईं।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, ने रुहेलखंड और अवध के सीमावर्ती क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया तथा ब्रिटिश जनरल कैंपबेल के साथ कई भयंकर लड़ाइयां लड़ीं।
3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से अंततः मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके दौरान बेगम हजरत महल और अहमदुल्लाह शाह दोनों ने अंग्रेजों के समक्ष बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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विजयनगर प्रशासन में प्रांतीय राज्यपालों को क्या कहा जाता था?
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दक्षिण भारत के राजवंशों और वर्धन वंश के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम, जो अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म के अनुयायी थे, शैव संत अप्पर (थिरूनवुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म के अनुयायी बन गए और उन्होंने त्रिचिरापल्ली में प्रसिद्ध रॉक-कट मंदिर का निर्माण करवाया।
2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने ऐहोल शिलालेख (जिसे रविचर्ति ने रची थी) में हर्षवर्धन पर अपनी विजय का उल्लेख किया है, जिसमें यह भी दर्शाया गया है कि पुलकेशिन ने नर्मदा नदी के तट पर हर्ष के 'आनंद' को समाप्त कर दिया था।
3. चोल राजवंश के पुनरुत्थान के संस्थापक परांतक प्रथम ने मदुरै पर अधिकार कर लिया था और 'मदुरैकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा उसने प्रसिद्ध तक्कोलम के युद्ध में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय को निर्णायक रूप से पराजित किया था।
4. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय (जिन्होंने 'राजसिंह' की उपाधि धारण की थी) के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'शोर मंदिर' (Shore Temple) का निर्माण हुआ था, जो विशुद्ध रूप से द्रविड़ वास्तुकला की राजसिंह शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक काल (नरम दल) तथा बाद के गरम दल के उद्भव और उनकी कार्यप्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के शुरुआती नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यशैली मुख्य रूप से '3P' (याचिका, प्रार्थना और विरोध प्रदर्शन - Petition, Prayer and Protest) पर आधारित थी, तथा उनका ब्रिटिश न्यायप्रियता और ब्रिटिश साम्राज्य की संवैधानिक प्रकृति में अटूट विश्वास था।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न राजनीतिक असंतोष के गर्भ से उभरे गरम दल के प्रमुख नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने ब्रिटिश शासन के समक्ष प्रार्थना करने की नीति को खारिज करते हुए 'स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा' के माध्यम से 'स्वराज' प्राप्ति को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया।
3. वर्ष 1907 के प्रसिद्ध सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक और संगठनात्मक मतभेदों के कारण कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें गरमपंथियों की मांग थी कि रास बिहारी घोष को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जाए, जबकि नरमपंथी लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाना चाहते थे।
4. वर्ष 1916 के ऐतिहासिक लखनऊ अधिवेशन में ए. सी. मजूमदार की अध्यक्षता में कांग्रेस के दोनों गुटों (नरम दल और गरम दल) के बीच पुनर्मिलन हुआ, तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए 'लखनऊ पैक्ट' ने भविष्य की सांप्रदायिक राजनीति की नींव को मजबूत करने का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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