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History of India
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संगीत के क्षेत्र में "कर्नाटक संगीत" का पितामह किसे माना जाता है जो विजयनगर काल के समकालीन थे?

Detailed Explanation

पुरंदर दास को कर्नाटक संगीत का पितामह कहा जाता है।
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार, उनके दार्शनिक आधार और प्रमुख संतों के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जिन्होंने अपनी लोक-भाषा (तमिल) के प्रयोग के माध्यम से जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करते हुए भक्ति को जन-सामान्य तक पहुँचाया था, तथा उनके पदों का संकलन 'नालयिर दिव्य प्रबंधम' में किया गया है। 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत और वर्गीय सीमाओं को अस्वीकार करते हुए राम की भक्ति का उपदेश दिया, तथा उनके शिष्यों में रैदास (जूता बनाने वाले), सेना (नाई) और कबीर (जुलाहा) जैसे समाज के विभिन्न वर्गों से आने वाले संत सम्मिलित थे। 3. सूफी मत के संदर्भ में, भारत में चिश्ती सिलसिला की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, जिन्होंने राज्य के संरक्षण और शाही दरबार से निकटता को आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनिवार्य माना तथा शाहजहाँ के काल में दारा शिकोह इसी सिलसिले से जुड़े थे। 4. महान दार्शनिक शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के विपरीत, वल्लभाचार्य ने 'शुद्धैद्वैत' का सिद्धांत दिया, जिसके अंतर्गत भगवान कृष्ण की भक्ति पर बल देते हुए 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना की गई थी, जो विशुद्ध रूप से भक्ति और भगवत्कृपा पर आधारित था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना हुई, जिनमें बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (वाई बी चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकारें थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से ब्रिटिश नजरबंदी से चुपचाप निकलकर जर्मनी पहुँचे और वहाँ उन्होंने बर्लिन रेडियो से भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किया तथा वहीं जर्मन सैन्य सहायता से 'इंडियन लीजन' (फ्री इंडिया सेंटर) की स्थापना की। 3. सिंगापुर के पतन के पश्चात रास बिहारी बोस ने जापान के सहयोग से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का गठन किया, किंतु मोहन सिंह के साथ जापानी सैन्य अधिकारियों के मतभेदों के कारण आईएनए का पहला चरण असफल हो गया, जिसे बाद में पुनर्जीवित करने के लिए सुभाष चंद्र बोस को वर्ष 1943 में सिंगापुर आमंत्रित किया गया था। 4. आजाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' की कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल के हाथों में थी, और यह पूरी तरह से महिलाओं की एक समर्पित युद्धक रेजिमेंट थी, जिसने ब्रिटिश सेना के खिलाफ बर्मा और इम्फाल मोर्चे पर सक्रिय सैन्य कार्रवाई में भाग लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और केंद्रीय मंत्रियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी प्रणाली में 'जात' पद मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और उसके वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था। 2. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी प्रणाली के अंतर्गत 'सिंहमह' (Du-aspa Sih-aspa) प्रणाली शुरू की गई थी, जिसके तहत बिना जात पद बढ़ाए घुड़सवारों की संख्या दोगुनी की जा सकती थी। 3. मुगल केंद्रीय प्रशासन में 'मीर बख्शी' सैन्य विभाग का प्रमुख होने के साथ-साथ खुफिया और सूचना विभाग (वाइफाइ नवीस) का भी प्रभारी था, तथा वह मनसबदारों के घोड़ों के दागने (दाग) और सैनिकों के हुलिया का निरीक्षण करने का उत्तरदायित्व निभाता था। 4. औरंगजेब के शासनकाल में मराठा मनसबदारों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, और संपूर्ण मुगल इतिहास में मराठा मनसबदारों का प्रतिशत उसके काल में सर्वाधिक था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत से बाहर क्रांतिकारी गतिविधियों और 'गदर आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे सामान्यतः गदर पार्टी के नाम से जाना जाता है और इसके पहले अध्यक्ष सोहन सिंह भकना थे। 2. गदर पार्टी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र 'गदर' का मुख्य शीर्षक 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' था, जो प्रारंभिक रूप से गुरुमुखी और उर्दू में प्रकाशित होता था। 3. गदर क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सेना में तैनात भारतीय सैनिकों को अपने पाले में लाने और फरवरी 1915 में देशव्यापी सशस्त्र विद्रोह भड़काने की गुप्त योजना बनाई थी, जिसे ब्रिटिश खुफिया तंत्र द्वारा विफल कर दिए जाने के बाद 'लाहौर षड्यंत्र मामला' चलाया गया था। 4. गदर आंदोलन की असफलता के पश्चात इसके प्रमुख नेता लाला हरदयाल ने जर्मनी की सहायता से बर्लिन में 'इंडियन इंडिपेंडेंस कमेटी' का गठन करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था और वे आजीवन क्रांतिकारी राजनीति से संन्यास लेकर अमेरिका में ही बस गए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के वैधानिक व ऐतिहासिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन का कांग्रेस द्वारा पूर्ण बहिष्कार किया गया था, क्योंकि इस सम्मेलन में ब्रिटिश सरकार ने 'डोमिनियन स्टेट्स' (औपनिवेशिक स्वराज्य) को भारत के भविष्य के संवैधानिक ढांचे के रूप में स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। 2. मार्च 1931 में महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के मध्य हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने उन सभी राजनैतिक बंदियों को तुरंत रिहा करना स्वीकार कर लिया था जिन पर हिंसा के गंभीर आरोप या हत्या के मुकदमे दर्ज थे। 3. कराची अधिवेशन (1931) में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन करते हुए पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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