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History of India
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अष्टदिग्गजों में सबसे प्रसिद्ध कवि कौन थे जिन्हें "तेलुगु कविता का पितामह" कहा जाता है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अल्लासानी पेद्दन को तेलुगु कविता का पितामह माना जाता है।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में स्वतंत्रता संग्राम के दो प्रमुख स्तंभों—वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के उपरांत वीर कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ कैमूर की पहाड़ियों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया और अंग्रेजों को मात देते हुए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और बलिया तक एक सफल सैन्य अभियान चलाया था।
2. अमर सिंह ने कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात जगदीशपुर और शाहाबाद के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लंबे समय तक एक सशक्त समानांतर सरकार चलाई और छापामार (गुरिल्ला) युद्ध पद्धति का अत्यंत प्रभावी ढंग से संचालन किया।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए संघर्ष को कुचलने के लिए ब्रिटिश सेनापति मेजर विन्सेंट आयर और कमिश्नर विलियम टेलर को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, और अंततः अंग्रेजों ने शाहाबाद क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए अमर सिंह के साथ एक औपचारिक संधि की थी।
4. कुंवर सिंह ने अपनी अंतिम सैन्य कार्रवाई के दौरान जगदीशपुर के निकट ब्रिटिश सेनापति कैप्टन ली ग्रांड (Captain Le Grand) की टुकड़ी को पूरी तरह पराजित किया था, हालांकि इस भीषण संघर्ष के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण कुछ ही दिनों पश्चात उनका निधन हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (Moderate) और गरम दल (Extremist) के कालखंड तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रारंभिक कांग्रेस के नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी और गोपाल कृष्ण गोखले) की ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट आस्था थी और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की संवैधानिक पद्धति में विश्वास रखते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात कांग्रेस के भीतर उग्रवादी (गरम दल) विचारधारा का तीव्र विकास हुआ, जिसके प्रमुख नेताओं—लाल, बाल और पाल—ने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा को राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक व रणनीतिक मतभेदों के कारण हुआ था, तथा इस अधिवेशन में गरम दल के नेताओं ने अंग्रेजों के साथ पूर्ण असहयोग और सशस्त्र क्रांति का औपचारिक प्रस्ताव पारित करवा लिया था।
4. उग्रवादी नेताओं का यह मानना था कि स्वशासन (Home Rule) या स्वराज्य ही राजनीतिक मुक्ति का एकमात्र मार्ग है, और इसके लिए जनता की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी और संघर्ष आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और भारतीय स्वतंत्रता के लिए चलाए गए क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें समाजवाद को इसके घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य बनाया गया था।
2. भगत सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या का मुख्य उद्देश्य लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेना था, जिसे साइमन कमीशन के विरोध के दौरान घायल किया गया था।
3. वर्ष 1929 में केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में बम फेंकने की ऐतिहासिक घटना का नेतृत्व भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने किया था, जिसका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहरों को सुनना' और ट्रेड डिस्प्यूट बिल तथा पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करना था।
4. चटगांव शस्त्रागार लूट कांड (1930) का नेतृत्व सूर्य सेन (मास्टर दा) ने किया था, जिन्होंने 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' (IRA) की चटगांव शाखा के माध्यम से ब्रिटिश हथियारों पर कब्जा करने की योजना बनाई थी और इस दल में कल्पना दत्त एवं प्रीतिलता वाडेदार जैसी वीर महिलाएँ भी शामिल थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य तथा महात्मा गांधी की राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के विरुद्ध सविनय अवज्ञा के सफल प्रयोग के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (जैसे प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार) की नींव रखी, जिसे बाद में चंपारण कृषि अधिनियम, 1918 द्वारा कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया।
2. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध देशबंधु चित्तरंजन दास ने किया था, परंतु नागपुर के वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920) में उन्होंने ही स्वयं असहयोग आंदोलन के मुख्य प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे प्रस्तुत किया था।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए महात्मा गांधी ने चौरी-चौरा की घटना (फरवरी 1922) के बाद ही तुरंत राष्ट्रव्यापी स्तर पर 'कर न दो' (No-Tax) आंदोलन शुरू करने का निर्देश दे दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह (1918) के दौरान, जहाँ फसल नष्ट होने के कारण लगान माफी की मांग की गई थी, सरदार वल्लभभाई पटेल और गांधीजी के नेतृत्व में किसानों ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध दृढ़ संकल्प दिखाते हुए अपनी संपत्तियों की कुर्की के बावजूद लगान का भुगतान करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी शासक और सामंत अपने संकीर्ण क्षेत्रीय हितों से प्रेरित थे, जिसके कारण उनमें अखिल भारतीय दृष्टिकोण और एक साझा राजनीतिक एजेंडे का पूर्ण अभाव था।
2. नाना साहब, बेगम हजरत महल और खान बहादुर खान जैसे नेताओं ने अपने क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, किंतु आधुनिक सैन्य तकनीक, केंद्रीकृत संगठन और सुदृढ़ संचार साधनों की कमी के कारण वे अंग्रेजों की सैन्य शक्ति का दीर्घकालिक सामना नहीं कर सके।
3. शिक्षित मध्य वर्ग, व्यापारियों और अधिकांश भारतीय रजवाड़ों (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) ने इस विद्रोह से दूरी बनाए रखी या प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश सेना को सहायता प्रदान की, जिससे विद्रोह का दायरा सीमित हो गया।
4. विद्रोहियों के पास कोई स्पष्ट भविष्य की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक योजना नहीं थी कि विजय के पश्चात देश की प्रशासनिक व्यवस्था किस प्रकार चलाई जाएगी, जो इसकी सबसे बड़ी आंतरिक कमजोरी साबित हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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