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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पाउल टोरेन्स (E. Paul Torrance) के 'सृजनात्मकता के सिद्धांत' (Theory of Creativity) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सृजनात्मक चिंतन के आयाम: लचीलापन और मौलिकता' (Dimensions of Creative Thinking: Flexibility and Originality)**—जिसे उन दो विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमताओं के रूप में परिभाषित किया जाता है जिनके अंतर्गत 'लचीलापन' (Flexibility) किसी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न श्रेणियों या दृष्टिकोणों से सोचने की क्षमता को दर्शाता है, जबकि 'मौलिकता' (Originality) विचारों की अनूठापन, दुर्लभता और लीक से हटकर कुछ नवीन उत्पन्न करने की शक्ति को इंगित करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के Divergent Thinking (अपसारी चिंतन), समस्या-समाधान और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पाउल टोरेन्स के सृजनात्मकता सिद्धांत के अनुसार, 'लचीलापन' (Flexibility) और 'मौलिकता' (Originality) अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) के अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इनका उपयोग विद्यार्थियों को लीक से हटकर सोचने, पारंपरिक रूढ़ियों को तोड़ने और किसी समस्या के कई संभावित एवं अनूठे समाधान ढूँढने में मदद करता है। यह बाल केंद्रित शिक्षा और समग्र संज्ञानात्मक विकास के लिए वैज्ञानिक रूप से अत्यधिक प्रामाणिक है। विकल्प 'c' इस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय के वास्तविक निहितार्थ को सर्वोत्तम रूप से स्पष्ट करता है।
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