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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय नियम—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को आनंद या संतोष की अनुभूति होती है तथा इसके विपरीत होने पर झुंझلاहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की प्रेरणा, मानसिक तैयारी और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
थार्नडाइक के अधिगम के मुख्य नियमों में से एक 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) यह स्पष्ट करता है कि अधिगम तभी प्रभावी और संतोषजनक होता है जब शिक्षार्थी मानसिक और शारीरिक रूप से उस कार्य को सीखने के लिए तैयार (Ready) हो। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शिक्षक को विद्यार्थियों में पूर्व-ज्ञान को जागृत करके और उनकी रुचि व प्रेरणा को बढ़ाकर 'तत्परता' की स्थिति उत्पन्न करनी चाहिए, जिससे उनका संज्ञानात्मक तंत्र ज्ञान को आसानी से आत्मसात कर सके।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक निरूपण स्तर—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे लगभग बाल्यावस्था के उत्तरार्ध और किशोरावस्था के दौरान विकसित होने वाली उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं या चित्रों के सहारे के बिना, अमूर्त प्रतीकों, भाषा, तार्किक संकेतों, गणितीय सूत्रों और कोडिंग प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक दुनिया को मानसिक रूप से प्रस्तुत और विश्लेषित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, औपचारिक संक्रियात्मक विकास और उन्नत वैचारिक संकल्पनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस आंतरिक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक मानसिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत यदि कोई जीव या शिक्षार्थी सीखने के लिए पूरी तरह तैयार है, तो उसे कार्य करने में संतोष (Satisfaction) और आनंद की प्राप्ति होती है, और यदि वह तैयार नहीं है और उसे जबरन कार्य कराया जाता है, तो उसे झुंझलाहट या असंतोष (Annoyance) होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की प्रेरणा, परिपक्वता स्तर और संज्ञानात्मक अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतर्वैयक्तिक बुद्धि' (Interpersonal Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट सामाजिक-संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति अन्य लोगों के सूक्ष्म मनोभावों, प्रेरणाओं, इरादों, भावनाओं और उनके व्यवहारात्मक पैटर्नों को सटीक रूप से समझने, उनका विश्लेषण करने और उनके साथ प्रभावी ढंग से संवाद तथा समन्वय स्थापित करने में अत्यधिक कुशल होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning), सामाजिक सामंजस्य और नेतृत्व कौशल के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक प्रक्रिया—**'आत्मसातीकरण या आत्मीकरण' (Assimilation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक अपने पूर्व-मौजूद मानसिक स्कीमा (Schema) में किसी नई जानकारी, वस्तु या अनुभव को बिना किसी संरचनात्मक परिवर्तन के सीधे तौर पर समाहित या समायोजित कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान के अनुप्रयोग, संकल्पना निर्माण और तार्किक सरलीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) अथवा 'ग्रहणशील अधिगम' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठक या एडवांस ऑर्गनाइज़र' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले छात्रों के संज्ञान में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान (पूर्व-ज्ञान) के साथ नए आने वाले सूचना-समुच्चयों को जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त वैचारिक ढांचा या परिचय प्रस्तुत किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा निर्माण, तार्किक अनुक्रमण और संज्ञानात्मक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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