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History of India
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किस इतिहासकार ने लोदी काल को "मध्यकालीन भारत का पुनर्जागरण काल" कहा है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डॉ. के. एस. लाल ने लोदी काल को यह संज्ञा दी है।
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महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में प्राचीन भारत के 'षोडश महाजनपदों' (16 महाजनपदों) की सूची मिलती है, जिसमें वज्जी संघ आठ कुलों का एक संघ (Confederacy) था और इसकी राजधानी वैशाली थी जो विश्व के शुरुआती गणतंत्रात्मक उदाहरणों में गिनी जाती है।
2. मगध साम्राज्य के उत्थान में हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी कूटनीति और वैवाहिक गठबंधनों (जैसे कौशल्या, चेलना और मद्र कुल की राजकुमारी क्षेमा से विवाह) के माध्यम से अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके उत्तराधिकारी अजातशत्रु ने वज्जी संघ पर विजय प्राप्त करने के लिए वसकार (Varasakara) नामक कूटनीतिज्ञ मंत्री की सहायता ली थी।
3. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती महाजनपद को मगध साम्राज्य में मिलाकर उसकी लंबी शत्रुता का अंत किया, तथा अपनी प्रारंभिक राजधानी राजगृह के स्थान पर वैशाली को अपनी राजधानी बनाया, जिसे बाद में उसके उत्तराधिकारी कालाशोक ने पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया था।
4. नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (क्षत्रिय वंशों का नाश करने वाला) और 'एकराट्' की उपाधि से विभूषित किया गया है, तथा नंद वंश के शासनकाल में ही सिकंदर का भारत पर आक्रमण हुआ था जिसके भय से मगध की सेना ने व्यास नदी को पार करने से इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जहाँगीर की रानी कौन थी?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी पैतृक पेंशन और उपाधि को बंद कर दिया था तथा उन्हें बिठूर से कानपुर आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
2. तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) नाना साहब के अत्यंत योग्य और वफादार सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक सफल छापामार युद्ध का संचालन किया था।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और राजनीतिक दूत थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तुर्की और क्रीमिया का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जिसके दौरान 'सती चौरा घाट' की घटना घटी थी, और अंततः नाना साहब ब्रिटिश सेना को परास्त कर सुरक्षित रूप से यूरोप चले गए थे, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज सभा का आयोजन चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और हीनयान तथा अन्य संप्रदायों पर उसकी श्रेष्ठता स्थापित करना था।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण हमें कांचीपुरम के मुक्ताईश्वर मंदिर के शिलालेख में मिलता है।
3. पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी (बादामी) पर आक्रमण कर चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोण्ड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी।
4. तंजौर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण चोल राजा राजराज प्रथम द्वारा कराया गया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति है और इसकी दीवारों पर चोल साम्राज्य के नौसेना अभियानों का वर्णन मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा पुनर्गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के मध्य वैचारिक एवं रणनीतिक संपर्कों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जेल में बंद था, तब उषा मेहता द्वारा संचालित 'भूमिगत कांग्रेस रेडियो' पर सुभाष चंद्र बोस की गुप्त रूप से प्रसारित होने वाली ओजस्वी आवाज को नियमित रूप से प्रसारित किया जाता था, जिससे देशवासियों में प्रतिरोध की भावना प्रबल हुई।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापान पहुँचने के पश्चात् 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की विचारधारा को त्याग दिया और आजाद हिंद फौज की कमान संभालते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा।
3. आजाद हिंद फौज के अंतर्गत गठित 'रानी झांसी रेजीमेंट' पूरी तरह महिलाओं की एक लड़ाकू इकाई थी, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था और इस रेजीमेंट ने इम्फाल अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सैन्य सहभागिता की थी।
4. भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और कांग्रेस के भारत छोड़ो आंदोलन—दोनों का पूर्ण समर्थन किया क्योंकि वे इसे साम्राज्यवादी युद्ध के विरुद्ध अंतिम मुक्ति संघर्ष मानते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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