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History of India
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मोठ की मस्जिद की वास्तुकला में किस शैली का अभाव है?

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मोठ की मस्जिद में मीनारों का अभाव है।
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→ सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा कालीन नगरों में 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) के आधार पर सड़कों का निर्माण किया गया था, जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, तथा अधिकांश घरों के मुख्य द्वार मुख्य सड़क की ओर न खुलकर पीछे की गलियों में खुलते थे। 2. सिंधु सभ्यता के लगभग सभी स्थल दो भागों—पश्चिमी भाग (दुर्ग/सिटाडेल) और पूर्वी भाग (निचला नगर)—में विभाजित थे, किंतु धोलावीरा एकमात्र ऐसा स्थल है जो तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था। 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों या विशेष अवसरों पर सार्वजनिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसके उत्तर और दक्षिण दोनों सिरों पर सीढ़ियाँ बनी थीं और इसके जल के रिसाव को रोकने के लिए बिटुमिन (डामर) की परत का प्रयोग किया गया था। 4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे और पक्की ईंटों के निर्माण तकनीक से पूरी तरह परिचित थे, तथा उन्होंने रक्षात्मक दीवारों के निर्माण में केवल हाथ से बनी हुई अपरिष्कृत ईंटों का प्रयोग किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह के दमन किए गए क्षेत्रों से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली — जॉन निकलसन और विलियम हडसन 2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस 3. झांसी और ग्वालियर — सर ह्यूरोज 4. जगदीशपुर (बिहार) — विंसेंट आयर और मेजर विलियम टेलर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → कृष्णदेव राय के दरबार में रहने वाले "अष्टदिग्गज" कौन थे? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के परिणाम और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (महारानी विक्टोरिया) के अधीन आ गया, जिसके तहत कंपनी के 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके स्थान पर भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का गठन किया गया। 2. इलाहाबाद में आयोजित एक भव्य दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे भारत का मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है) में भारतीय रियासतों के विलय की नीति को समाप्त करने की घोषणा की गई और भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार न करने का आश्वासन दिया गया। 3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और नस्लीय समानता का वादा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश भारत में बिना किसी नस्ल, जाति या धर्म के भेदभाव के सरकारी नौकरियों में योग्यता के आधार पर अवसर दिए जाएंगे, तथा भारतीय प्रजा के प्राचीन धार्मिक एवं सामाजिक आचार-विचारों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाई जाएगी। 4. विद्रोह की समाप्ति के उपरांत ब्रिटिश सेना का पुनर्गठन करते हुए यूरोपीय सैनिकों का अनुपात कम किया गया और भारतीय सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि की गई, तथा तोपखाने जैसे रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य विभागों का पूर्ण नियंत्रण पूरी तरह से भारतीय सैनिकों के हाथों में सौंप दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन और प्रमुख संगठनों (विशेषकर गदर पार्टी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और चटगांव शस्त्रागार लूट) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भखना द्वारा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'ग़दर दी गूँज' नामक साप्ताहिक पत्र के माध्यम से औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध वैचारिक और सशस्त्र संघर्ष का संदेश फैलाया, जिसका मुख्य मुखपत्र 'द गदर' उर्दू और गुरुमुखी के अलावा गुजराती और पश्तो में भी प्रकाशित होता था। 2. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) ने समाजवाद को अपने घोषणापत्र का मुख्य आधार बनाया और भगत सिंह के आग्रह पर इसमें 'सोशलिस्ट' शब्द जोड़ा गया। 3. अप्रैल 1930 में सूर्य सेन (मास्टर दा) के नेतृत्व में 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' (चटगांव शाखा) द्वारा किए गए चटगांव शस्त्रागार आक्रमण में भाग लेने वाली क्रांतिकारी महिलाओं में प्रीतिलता वाडेदार और कल्पना दत्त प्रमुख थीं, जिन्होंने शस्त्रागार पर कब्जा करने के बाद अस्थायी क्रांतिकारी सरकार की घोषणा की थी। 4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में फेंके गए बमों का मुख्य उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि 'बहरेकानों को अपनी बात सुनाना' तथा ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसे दमनकारी कानूनों के विरोध में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना था, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने गिरफ्तारी भी स्वेच्छा से दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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