त्वरित लिंक्स
MPTET
4 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)**—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही आयाम या दृश्य पक्ष पर ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण / Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं, आयामों और दृष्टिकोणों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने की योग्यता अर्जित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक चिंतन, संरक्षण (Conservation) की अवधारणा और बहु-आदशर्शिक दृष्टिकोण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषता है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे 'केंद्रण' (Centration) से ग्रसित होते हैं—अर्थ वे किसी वस्तु या स्थिति के केवल एक ही आयाम (जैसे केवल ऊंचाई या केवल चौड़ाई) पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। जब बालक विकेंद्रीकरण की क्षमता विकसित कर लेता है, तो वह वस्तु के एकाधिक आयामों (जैसे ऊंचाई और चौड़ाई दोनों) को एक साथ ध्यान में रख सकता है, जिससे वह 'संरक्षण' (Conservation) की योग्यता प्राप्त करता है। यह कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों को गणितीय, वैज्ञानिक और तार्किक समस्याओं के समाधान में बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने में मदद करता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचनात्मक प्रणालियों—'इदम' (Id), 'अहम' (Ego), और 'पराअहम' (Superego)—के आपसी संघर्ष तथा 'रक्षा तंत्र' (Defense Mechanisms) के अंतर्गत आने वाले प्रमुख रूपों—जैसे 'दमन' (Repression), 'प्रक्षेपण' (Projection), और 'युक्तिकरण' (Rationalization)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य समायोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement)—जैसे कि सतत पुनर्बलन (Continuous Reinforcement) बनाम आंशिक/अंतराल एवं आनुपातिक पुनर्बलन (Intermittent/Ratio Schedules)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वांछित व्यवहार के स्थायित्व (Resistance to Extinction) तथा 'शपिंग' (Shaping) प्रक्रिया के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'नकारात्मक सुदृढ़ीकरण' (Negative Reinforcement)**—जिसके तहत किसी अप्रिय, कष्टदायक या प्रतिकूल उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाकर या रोककर किसी वांछित वांछनीय व्यवहार या अनुक्रिया (Desired Response) की आवृत्ति, संभावना और दर को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहार, अनुशासन प्रबंधन और सकारात्मक प्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)**—जिसे लगभग 2 से 7 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक प्रतीकात्मक विचारों और भाषा का उपयोग करना तो सीख जाता है, किंतु वह केंद्रीय संज्ञानात्मक सीमा—**'आत्म-केंद्रितता' (Egocentrism)**—(अर्थात यह असमर्थता कि बालक इस बात को समझने में विफल रहता है कि अन्य लोग उसके अपने दृष्टिकोण से अलग दृष्टिकोण या विचार भी रख सकते हैं) से ग्रसित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Perspective-taking), संवादात्मक विकास और बहु-आयामी चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रिचर्ड अल्बर्ट्स और रॉबर्ट सेल्मैन (Robert Selman) के 'सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण करने के सिद्धांत' (Theory of Social Perspective Taking) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रतिबिंबित या तृतीय-व्यक्ति परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Self-Reflective / Third-Person Perspective Taking)**—जिसे उस विकासात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत लगभग 10 से 15 वर्ष की आयु का बालक यह भली-भांति समझने में सक्षम हो जाता है कि न केवल वह दूसरों के दृष्टिकोण को देख सकता है, बल्कि वह एक तटस्थ 'तृतीय-व्यक्ति' या बाहरी प्रेक्षक की स्थिति से स्वयं के और किसी अन्य व्यक्ति के पारस्परिक दृष्टिकोणों को एक साथ एक ही समय पर वस्तुनिष्ठ (Objective) रूप से देख और मूल्यांकित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक संज्ञान, विकेंद्रीकृत तार्किक क्षमता और सहानुभूतिपूर्ण सह-अस्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.