BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
4 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्व-प्रभाविता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्ति के अपने स्वयं के विश्वास या आंतरिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके आधार पर वह यह आंकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और वांछित परिणाम प्राप्त करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, दृढ़ता (Perseverance), लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक निष्पत्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत (Social Cognitive Theory) में 'स्व-प्रभाविता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसका तात्पर्य व्यक्ति की उस व्यक्तिगत मान्यता से है कि वह किसी विशेष कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित कर सकता है। जिन विद्यार्थियों में उच्च स्व-प्रभाविता होती है, वे कठिन कार्यों को चुनौतियों के रूप में लेते हैं न कि खतरों के रूप में। वे कठिन परिस्थितियों में अधिक दृढ़ता दिखाते हैं, असफलता मिलने पर अपनी कार्य-रणनीतियों का विश्लेषण कर उनमें सुधार करते हैं, और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आंतरिक रूप से प्रेरित रहते हैं। इसके विपरीत, निम्न स्व-प्रभाविता वाले छात्र अपनी क्षमताओं पर संदेह करते हैं, कठिन कार्यों से बचते हैं और असफलता मिलने पर जल्दी हार मान लेते हैं। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित करता है।
Share:

Related Questions

→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोज अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा या शिक्षार्थी वस्तुओं या क्रियाओं के बजाय अमूर्त प्रतीकों, भाषा, तार्किक संकेतों और गणितीय सूत्रों के माध्यम से ज्ञान को ग्रहण करता है और उसका मानसिक प्रतिनिधित्व (Mental Representation) करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन, भाषा-आधारित संप्रेषण और तार्किक संप्रत्यय निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत व्यक्तित्व की संरचना से जुड़ी तीन मानसिक अवस्थाओं—इदम (Id), अहम् (Ego), और पराहम् (Superego)—के आपसी गतिक संतुलन और रक्षा तंत्र (Defense Mechanisms) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका मार्ग (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो उसे संतोष (Satisfaction) प्राप्त होता है तथा जब वह तैयार नहीं होता और उसे विवश किया जाता है, तो झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, अधिगम की तत्परता और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) की अवस्था के भीतर आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) के अभिविन्यास—जिसके तहत व्यक्ति कानूनों और नियमों को कठोर और अपरिवर्तनीय मानने के बजाय सामाजिक कल्याण, निष्पक्षता, मानवीय अधिकारों और लोकतांत्रिक समझौतों के संदर्भ में आंकता है, तथा यह मानता है कि यदि कोई नियम समाज के बुनियादी मूल्यों या मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे बदला जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तार्किकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उरी ब्रॉन्फेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकीय प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मेसोसिस्टम या मध्य-प्रणाली' (Mesosystem)**—जिसे उस अंतर्संबंध के रूप में परिभाषित किया जाता है जो विकासशील बच्चे के विभिन्न सूक्ष्म-तंत्रों (Microsystems, जैसे—परिवार, विद्यालय, साथियों का समूह और पड़ोस) के बीच आपसी अंतःक्रिया और संप्रेषण के माध्यम से बनता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, सामाजिक समायोजन और शैक्षणिक समन्वय के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.