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History of India
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दिल्ली सल्तनत के पतन का सबसे दूरगामी कारण क्या था?

Detailed Explanation

उत्तराधिकार के निश्चित नियम न होने से हमेशा कलह रहती थी।
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→ अकबर के समय दहशाला प्रणाली के तहत राजस्व निर्धारण के लिए किस अधिकारी की नियुक्ति की गई थी? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत में उभरे सोलह महाजनपदों और उनके वैचारिक तथा भौगोलिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिनमें से अधिकांश महाजनपद गंगा घाटी के मैदानी भागों में स्थित थे और इनमें राजशाही के साथ-साथ वज्जी और मल्ल जैसे संघेय (गणतांत्रिक) शासन प्रणालियों का भी अस्तित्व था। 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी, क्योंकि इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित घाटी थी, तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क के भंडार उपलब्ध थे जिससे मजबूत अस्त्र-शस्त्र बनाना संभव हुआ। 3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और साम्राज्यवादी विस्तार की नीति अपनाई, तथा अवंती के शासक प्रद्योत के पांडुरोग से ग्रसित होने पर अपने प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक को उनकी चिकित्सा के लिए उज्जैन भेजा था। 4. मगध के शासक अजातशत्रु (कुणिक) ने अपने शासनकाल में वैशाली के वज्जी महाजनपद को पराजित करने के लिए रथमुसल और महाशिलाकंटक जैसे नवीन सैन्य यंत्रों का प्रयोग किया था, और उसी के शासनकाल में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली के लाल किले में औरंगजेब ने किस सफेद संगमरमर की मस्जिद का निर्माण करवाया था? → मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च नागरिक और सैन्य अधिकारी 'तीर्थ' (या महामात्र) कहलाते थे, जिनकी संख्या कुल अठारह थी और इनमें 'सन्निधातृ' (राजकीय कोषाध्यक्ष) तथा 'समाहर्त्ता' (राजस्व संग्रह का मुख्य अधिकारी) सबसे महत्वपूर्ण थे। 2. अशोक के शिलालेखों और यूनानी विवरणों के अनुसार, मौर्य साम्राज्य चार प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसली थीं, तथा इन प्रांतों का प्रशासन शाही परिवार के राजकुमारों (जिन्हें 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' कहा जाता था) द्वारा संचालित किया जाता था। 3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी मामलों के न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' कहा जाता था जो व्यावहारिक कानूनों से संबंधित थे, जबकि फौजदारी मामलों (कानून और व्यवस्था या चोरी-डकैती) के न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, जिसके न्यायाधीश 'प्रदेशाष्ट्र' या 'प्रदेशाता' कहलाते थे। 4. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर परिषद द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों (प्रत्येक में पाँच सदस्य) में विभाजित थी, और ये समितियाँ शिल्प-कला, विदेशी मामलों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार-वाणिज्य तथा बिक्री कर संग्रह जैसे कार्यों का प्रबंध करती थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. सत्यशोधक समाज (1873) — ज्योतिराव फुले 2. देव समाज (1887) — शिव नारायण अग्निहोत्री 3. सेवा सदन (1885) — रामाबाई राडे 4. धर्म सभा (1830) — राधाकांत देव उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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