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History of India
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इब्राहिम लोदी का मकबरा कहाँ स्थित है?
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Detailed Explanation
इब्राहिम लोदी का मकबरा पानीपत में स्थित है।
Related Questions
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मराठा साम्राज्य के सुदृढ़ीकरण, छत्रपति शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन और उनके राजस्व सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी छह मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना पड़ता था और सेना का प्रत्यक्ष संचालन करना होता था।
2. शिवाजी ने अपने भू-राजस्व प्रशासन में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर 'काठी' नामक माप की इकाई का प्रयोग कर भूमि की पैमाइश की थी, और उन्होंने 'मिरासदारों' (वंशागत भूमि अधिकारों वाले स्थानीय सरदारों) के विशेषाधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर सीधे किसानों से लगat वसूलने की नीति लागू की।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख वित्तीय स्रोत थे; जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से उनकी सुरक्षा के एवज में वसूला जाने वाला 25% कर था, वहीं 'सरदेशमुखी' संपूर्ण क्षेत्र पर अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में वसूल किया जाने वाला 10% अतिरिक्त कर था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके रणनीतिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में स्वयं को पेशवा घोषित किया और मराठा प्रभुसत्ता को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, तथा ब्रिटिश सेना के विरुद्ध युद्ध संचालन के लिए उन्होंने तात्या टोपे को अपना मुख्य सैन्य कमांडर नियुक्त किया था।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के एक अत्यंत चतुर और विश्वसनीय सलाहकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष नाना साहब की पेंशन का मामला अत्यंत प्रभावशाली ढंग से रखा था, और कानपुर में विद्रोह के समय उन्होंने विद्रोही सैनिकों तथा विदेशी ताकतों के मध्य गुप्त कूटनीतिक समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के उपरांत 'सतीचौरा घाट' पर घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, जब अंग्रेजों ने जनरल हैवलॉक और जनरल नील के नेतृत्व में भीषण दमन किया, तब नाना साहब कालपी की ओर प्रस्थान कर गए और अंततः नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ उनका अंतिम जीवन इतिहास में अज्ञात रहा।
4. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य गतिविधियों का दायरा समेट लिया और अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने उन्हें माफ कर दिया और वे जीवन के अंतिम दिनों तक पेंशन भोगी के रूप में कानपुर में ही रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का छठा भाग (षडभाग) से लेकर एक-चौथाई भाग तक होती थी, जिसे 'उद्रंग' और 'उपरिकर' जैसे विभिन्न करों के माध्यम से वसूला जाता था, जहाँ 'उपरिकर' संभवतः स्थायी कृषकों पर लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त कर था।
2. इस काल में राजाओं और प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन देने की प्रथा लगभग समाप्त हो गई थी, जिसके स्थान पर धार्मिक एवं प्रशासनिक सेवाओं के बदले बड़े पैमाने पर कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार) देने की प्रथा शुरू हुई, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े।
3. गुप्त साम्राज्य में भूमि की खरीद-फरोख्त और दान से संबंधित प्रशासनिक कार्यों का विवरण देने के लिए 'पुण्ड्रवर्धन भुक्ति' (वर्तमान बंगाल) से प्राप्त दामोदरपुर और बैग्राम ताम्रपत्र अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हैं।
4. गुप्त काल की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनद्र' (दीनार) कहा जाता था, जो मुख्य रूप से व्यापारिक विनिमय और लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बहुतायत से प्रयोग होते थे, तथा स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद गुप्त सिक्कों में सोने की शुद्धता में निरंतर वृद्धि देखी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लोदी काल में समाज में किन जातियों का प्रभाव राजनैतिक रूप से बढ़ गया था?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के अंतर्गत जमींदारों को भूमि का पूर्ण स्वामी मान लिया गया था, और यदि वे निर्धारित तिथि पर सूर्यास्त से पहले भू-राजस्व जमा नहीं करते थे, तो उनकी जमींदारी का एक हिस्सा 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के तहत नीलाम कर दिया जाता था।
2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और किसानों (रयतों) के बीच सीधा समझौता था, जिसमें भूमि की माप और उर्वरा शक्ति के आधार पर कर निर्धारित किया जाता था, और लगान की दरें पूरी तरह से स्थायी थीं जिन्हें कभी बढ़ाया नहीं जा सकता था।
3. महालवारी व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल या ग्राम समुदाय) को भू-राजस्व भुगतान के लिए सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाया गया था, और इस प्रणाली का मुख्य प्रवर्तक हॉल्ट मैकेंज़ी था।
4. इन तीनों प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया और ग्रामीण ऋणग्रस्तता पूरी तरह समाप्त हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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