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History of India
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बाबर के दो प्रसिद्ध तोपची (Gunners) कौन थे जिन्होंने पानीपत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?

Detailed Explanation

उस्ताद अली और मुस्तफा बाबर के कुशल तोपची थे।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश सेना में जनवरी 1857 से पुरानी 'ब्राउन बेस' बन्दूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइفل' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था। 2. बैरकपुर छावनी में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में सार्जेंट ह्यूग बांघ और लेफ्टिनेंट बॉब पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई थी। 3. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के सभी भारतीय सैनिकों ने एकजुट होकर एक साथ दिल्ली की ओर कूच कर दिया था और संपूर्ण बंगाल रेजिमेंट ने अंग्रेजों के विरुद्ध औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा कर दी थी। 4. इस घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना प्रशासन ने संलिप्तता और अनुशासनहीनता के संदेह में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के उस संपूर्ण रेजिमेंट को औपचारिक रूप से भंग (Disband) कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विजयनगर साम्राज्य में मुख्य निर्यात की वस्तु क्या थी? → मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य (Golden Age) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक विस्तार हुआ, जिसके तहत राजाओं द्वारा ब्राह्मणों और अधिकारियों को दिए जाने वाले भू-दानों में कर-मुक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकार भी सौंपे जाने लगे, जिससे सामंतवाद के बीज अंकुरित होने लगे थे। 2. फाह्यान (Fahein), जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था, ने अपने विवरण में यह उल्लेख किया है कि उस समय भारत में बौद्ध धर्म अत्यंत समृद्ध और प्रगति पर था, तथा पाटलिपुत्र के बौद्ध विहारों में महायान और हीनयान दोनों संप्रदायों के भिक्षु एक साथ अध्ययन करते थे। 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में सिक्कों का एक विशिष्ट स्थान था; हालांकि समुद्रगुप्त और कुमारगुप्त प्रथम के काल में शुद्ध सोने के सिक्कों (दीनार) की अधिकता थी, किंतु स्कंदगुप्त के शासनकाल के उत्तरार्द्ध में आर्थिक संकट के कारण सिक्कों में सोने की मात्रा कम होने लगी और चांदी एवं तांबे के सिक्कों में गिरावट दर्ज की गई। 4. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय नियंत्रण अधिक कठोर था और मौर्य काल की भाँति नगर प्रशासन में 'सर्वाध्यक्ष' प्रणाली पूरी तरह सक्रिय थी, जिसमें सम्राट के सीधे हस्तक्षेप से प्रांतीय गवर्नरों ('उपरिक') की नियुक्ति की जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के सभी आठ मंत्रियों के पद पूरी तरह से वंशानुगत थे, और यह एक नीति-निर्माता मंत्रिमंडल था जो राजा के आदेशों के बिना भी स्वतंत्र रूप से कानून बनाने का पूर्ण अधिकार रखता था। 2. 'चौथ' कर पड़ोसी गैर-मराठा क्षेत्रों से उनकी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बदले वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा संपूर्ण महाराष्ट्र के सर्वोच्च देशमुखी (प्रधान मुखिया) होने के दावे के आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर के रूप में वसूला जाता था। 3. शिवाजी की घुड़सवार सेना में 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और अस्त्र-शस्त्र दिए जाते थे, जबकि 'बरगीर' अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में सम्मिलित होते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के संचालन और ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और तात्या टोपे ने उनके सैन्य कमांडर के रूप में विद्रोह का अत्यंत प्रभावी नेतृत्व किया। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने विद्रोह के वैचारिक प्रचार तथा कूटनीतिक संपर्कों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वे लंदन तक दूत के रूप में गए थे। 3. कानपुर में अंग्रेजों के आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'सतीचौरा घाट घटना' के पश्चात ब्रिटिश सेनापति जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम ने कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया। 4. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, और बाद में नरवर के एक स्थानीय जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर उन्हें फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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