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History of India
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आयुर्वेद के एक संस्कृत ग्रंथ का फारसी में "फरहंगे सिकंदरी" के नाम से अनुवाद किसने करवाया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सिकंदर लोदी ने चिकित्सा के इस ग्रंथ का अनुवाद करवाया था।
Related Questions
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से जमींदारों के लिए निश्चित कर दिया गया था, जिससे ब्रिटिश सरकार को भविष्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि होने पर भी राजस्व में किसी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि का लाभ नहीं मिलता था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा विकसित रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में लागू की गई थी, जिसमें सरकार और काश्तकार (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता होता था और व्यक्तिगत किसानों को भूमि का स्वामित्व व मालिकाना हक प्राप्त था।
3. महालवारी व्यवस्था, जिसे उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लागू किया गया था, के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण और भुगतान की जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक किसान की होती थी, न कि पूरे गाँव या महाल (गाँव के समूह) की सामूहिक इकाई पर।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक, प्रशासनिक और वैधानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, किंतु जमींदारों द्वारा समय पर लगान अदायगी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया था, जिसके तहत समय सीमा समाप्त होने से पहले भुगतान न होने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) को सौंपा गया था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें पूर्णतः स्थाई थीं और अकाल या सूखे जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में भी सरकार द्वारा लगान में कभी कोई छूट नहीं दी जाती थी।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी और विलियम बेंटिंक द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में विकसित महालवारी व्यवस्था के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के दीर्घकालिक प्रभाव के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और पारंपरिक निर्वाह कृषि की जगह नकदी फसलों (जैसे अफीम, कपास, नील और जूट) के उत्पादन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला, जिससे किसानों की स्थिति समृद्ध हो गई और वे महाजनों के ऋणजाल से पूरी तरह मुक्त हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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फिरोज शाह तुगलक ने किस सूफी संत के प्रति अपनी अपार श्रद्धा व्यक्त की थी?
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बहमनी काल में निर्मित बीदर का "मदरसा" अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध था, इसे किसने बनवाया था?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीला जल नीति) का प्रतिपादन किया था ताकि हिंद महासागर में पुर्तगाली नौसैनिक प्रभुत्व को स्थापित किया जा सके।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिलशाह सुल्तान से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया और सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया।
3. निनू दा कुन्हा ने पुर्तगाली मुख्यालय को कोचीन से बदलकर गोवा स्थानांतरित किया तथा वर्ष 1534 में बेसिन और 1535 में दीव पर अधिकार कर लिया।
4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर से गुजरने वाले अन्य देशों के जहाजों से कर (कार्टेज व्यवस्था) वसूला जाता था और उन्हें काली मिर्च तथा घोड़ों के व्यापार के अलावा अफीम और गोला-बारूद के व्यापार की पूरी छूट प्राप्त थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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