History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, ब्रह्म समाज, आर्य समाज और प्रार्थना समाज की वैचारिक एवं संस्थागत प्रवृत्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवादी दर्शन को आधार बनाया, किंतु समाज ने कभी भी वेदों की अमोघता (Infallibility) में विश्वास व्यक्त नहीं किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों को अपौरुषेय और समस्त ज्ञान का मूल स्रोत माना, तथा शुद्धि आंदोलन के माध्यम से उन हिंदुओं की घर-वापसी पर जोर दिया जिन्हें जबरन या धोखे से अन्य धर्मों में परिवर्तित कर दिया गया था।
- 3. महादेव गोविंद रानाडे और आत्माराम पांडुरंग द्वारा बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने धार्मिक सुधारों की तुलना में सामाजिक सुधारों (विशेषकर जातिगत कठोरता, अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह) को अधिक प्राथमिकता दी, और यह संस्था सीधे तौर पर ब्रह्म समाज की शाखा के रूप में ही कार्य करती थी।
- 4. यंग बंगाल आंदोलन (Young Bengal Movement) के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोजियो ने पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं और धार्मिक रूढ़िवादिता के विरुद्ध तार्किक स्वतंत्रता और मुक्त चिंतन का प्रचार किया, किंतु उन्हें भारतीय जनता और रूढ़िवादी वर्गीय समाज का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ क्योंकि उनके विचार आम जनमानस की भाषा में थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित ब्रह्म समाज ने एकेश्वरवाद पर जोर दिया और वेदों की सर्वोच्चता का सम्मान करने के बावजूद उन्हें अपौरुषेय या अचूक नहीं माना। कथन 2 सही है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों की अमोघता में विश्वास रखते हुए 'आर्य समाज' की स्थापना की और 'शुद्धि आंदोलन' चलाया। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रार्थना समाज ब्रह्म समाज की प्रत्यक्ष शाखा नहीं थी, बल्कि यह बंबई में एक स्वतंत्र सुधार संस्था के रूप में विकसित हुई थी, हालांकि इसके विचार ब्रह्म समाज से प्रेरित थे। कथन 4 गलत है क्योंकि हेनरी विवियन डेरोजियो के 'यंग बंगाल आंदोलन' को आम जनता या रूढ़िवादी समाज का समर्थन नहीं मिला था, बल्कि उनके विचार केवल कलकत्ता के कुछ शिक्षित युवाओं और छात्रों तक ही सीमित रहे और उन्हें समाज के व्यापक विरोध का सामना करना पड़ा।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में…
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की गतिविधियों और रणनीतिक सफलताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में नाना साहब ने स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का उत्तराधिकारी घोषित करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को समाप्त कर दिया और अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार व दीवान नियुक्त किया था।
2. नाना साहब के सैन्य कमांडर के रूप में तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल विंडहम को पराजित किया, किंतु बाद में सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में आई विशाल ब्रिटिश सेना के सामने उन्हें कानपुर छोड़ना पड़ा।
3. सतीचौरा घाट की घटना के उपरांत नाना साहब अंग्रेजों के साथ हुई संधि के तहत सुरक्षित रूप से नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ उनके जीवन के अंतिम वर्षों और मृत्यु के संबंध में ऐतिहासिक साक्ष्य आज भी पूरी तरह अस्पष्ट हैं।
4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर भारत के नवाबों और पेशवा की पेंशन के मामलों की पैरवी की थी और क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने यूरोपीय युद्ध रणनीतियों का अध्ययन कर विद्रोही सैनिकों को प्रशिक्षित करने में मदद की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व सुधारों और सैन्य प्रबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में भू-राजस्व की दर को बढ़ाकर उपज का आधा (50 प्रतिशत) कर दिया था और उसने मापन की प्रणाली के रूप में 'विश्वा' के स्थान पर 'बिस्वा' (बिस्वाह) को आधार बनाया तथा किसानों से सीधे कर वसूलने के लिए 'मुस्तकराज' नामक विशेष राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के अपने असफल निर्णय को वापस लेते हुए किसानों को राहत प्रदान करने के लिए 'सौंदर' (तकावी ऋण) नामक कृषि ऋण वितरित किए तथा कृषि के विकास और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की थी।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार सिंचाई के लिए नहरों का एक विस्तृत जाल बनवाया और उसने उलमा वर्ग की सलाह पर शरीयत के विरुद्ध माने जाने वाले सभी प्रकार के प्राचीन करों को समाप्त कर केवल चार प्रमुख शरीयत सम्मत कर (खराज, खम्स, जजिया और जकात) वसूले, तथा ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने अपने अफगान सरदारों को संतुष्ट करने और उनकी निष्ठा प्राप्त करने के लिए 'मंनद-ए-आली' की नीति का त्याग कर राजतंत्र के सर्वोच्च दैवीय अधिकारों पर बल दिया, जिससे सुल्तान और सरदारों के बीच समानता का पारंपरिक अफगान आदर भाव समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी के अतिरिक्त अवध का विलय भी उत्तराधिकारी के अभाव में नहीं बल्कि कुशासन (Maladministration) का आरोप लगाकर किया गया था, जिससे अवध की सेना और जनता में भारी रोष उत्पन्न हुआ।
2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने ईसाई धर्म अपनाने वाले भारतीयों को अपने पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने की पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों को लगा कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है।
3. आर्थिक कारणों के संदर्भ में ब्रिटिश मुक्त व्यापार नीति और औद्योगीकरण के दुष्प्रभावों ने पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, तथा भू-राजस्व की कठोर प्रणालियों (जैसे रयतवारी और महालवारी) के कारण किसान भारी कर्ज के जाल में फंस गए।
4. सैन्य कारणों में वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने बंगाल सेना के भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार (Overseas service) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया, जिसे उस समय की रूढ़िवादी हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जातिभ्रष्ट होने का प्रतीक माना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के उत्थान, शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था और उनकी सैन्य रणनीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दक्कन सल्तनतों (विशेषकर बीजापुर) की प्रशासनिक परंपराओं का त्याग करते हुए पूरी तरह प्राचीन हिंदू ग्रंथों पर आधारित 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद का गठन किया, जिसमें प्रत्येक मंत्री युद्ध क्षेत्र में व्यक्तिगत रूप से सेना का नेतृत्व करने के लिए बाध्य था और वे वंशानुगत अधिकारों के आधार पर अपने पदों पर आसीन होते थे।
2. शिवाजी के राजस्व प्रशासन में 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' दो प्रमुख कर प्रणालियाँ थीं, जिसमें चौथ पड़ोसी मुगल या दक्कनी क्षेत्रों से उस क्षेत्र की कुल आय का एक-चौथाई हिस्सा सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला कर था, जबकि सरदेशमुखी मराठा स्वराज्य के मुखिया के रूप में उनकी सर्वोच्चता को स्वीकार करते हुए कुल राजस्व का 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
3. शिवाजी की सेना में घुड़सवार सेना का अत्यधिक महत्व था, जिसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था - 'बरगीर' (वे सैनिक जिन्हें राज्य द्वारा हथियार और घोड़े प्रदान किए जाते थे) और 'सिलहदार' (वे सैनिक जो अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में भाग लेते थे), तथा सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए सैनिकों को लूट का माल अपने पास रखने की पूर्ण स्वतंत्रता दी जाती थी।
4. वर्ष 1665 में मुगलों की ओर से राजा जयसिंह और शिवाजी के मध्य हुई 'पुरंदर की संधि' के तहत शिवाजी को अपने कुल 35 किलों में से 23 किले मुगलों को सौंपने पड़े थे, और उन्हें अपने पुत्र शम्भाजी के साथ मुगल दरबार में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की शर्त को भी स्वीकार करना पड़ा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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