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History of India
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वैदिक साहित्य और दर्शन के संदर्भ में, 'षड्दर्शन' (छः आस्तिक दर्शन) और उनके प्रवर्तकों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. न्याय दर्शन — महर्षि गौतम
  2. 2. वैशेषिक दर्शन — महर्षि कणाद
  3. 3. सांख्य दर्शन — महर्षि कपिल
  4. 4.

उत्तर मीमांसा (वेदांत) — महर्षि जैमिनी उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वैदिक दर्शन के अंतर्गत भारत में छह आस्तिक दर्शनों (षड्दर्शन) का विकास हुआ है। युग्म 1, 2 और 3 सही सुमेलित हैं क्योंकि न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम, वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद और सांख्य दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कपिल हैं। किंतु चौथा युग्म गलत सुमेलित है; 'उत्तर मीमांसा' या 'वेदांत दर्शन' के प्रवर्तक महर्षि बादरायण (व्यास) हैं, जबकि महर्षि जैमिनी 'पूर्व मीमांसा' (कर्म मीमांसा) दर्शन के प्रवर्तक हैं। इस प्रकार सही विकल्प केवल 1, 2 और 3 है। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मनसबदारी व्यवस्था की शुरुआत अकबर द्वारा की गई थी, जिसमें 'जात' और 'सवार' श्रेणियाँ यह निर्धारित करती थीं कि मनसबदार का व्यक्तिगत पद क्या है और उसे कितने घुड़सवार रखने होंगे, तथा जहाँगीर के शासनकाल में इसमें 'दु-अस्मेह' और 'सिंह-अस्मेह' (या 'सिंह-अस्पा') जैसी विशेषताएँ जोड़ी गईं। 2. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत यदि जागीर से होने वाली आय छह महीने या उससे कम के बराबर होती थी, तो सैनिकों और अधिकारियों के वेतन में आनुपातिक कटौती कर दी जाती थी। 3. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मराठों और दक्षिण के अन्य शासकों को मनसबदारी व्यवस्था में शामिल करने के कारण अधिकारियों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई, जिसके परिणामस्वरूप जागीरदारी संकट (Jagirdari Crisis) उत्पन्न हुआ क्योंकि उपलब्ध खालसा भूमि की तुलना में जागीरों की कमी हो गई थी। 4. मुगल साम्राज्य की केंद्रीय राजस्व व्यवस्था में 'दीवान-ए-तन' विभाग जागीर और वेतन के मामलों की देखभाल करता था, जबकि 'मीर बख्शी' सैन्य विभाग का प्रमुख होने के साथ-साथ खुफिया और डाक विभाग का भी सर्वोच्च अधिकारी होता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन, नेतृत्वकर्ताओं और उनके दमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और उनके विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कैंपबेल थे, जिन्होंने अवध क्षेत्र में विद्रोही ताकतों को कुचला था। 2. बरेली में रुहेलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, और इस क्षेत्र में विद्रोह को पूरी तरह समाप्त कर पुनः अधिकार प्राप्त करने का श्रेय ब्रिटिश अधिकारी जनरल कॉलिन कैंपबेल को जाता है। 3. इलाहाबाद में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने वहाँ के स्थानीय नागरिकों और सैनिकों का संगठन कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी, किंतु कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद में इस विद्रोह का दमन किया था। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने पचास हजार रुपए का इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा (पवैन के राजा) के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन और उनके दमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और उनके विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कैंपबेल थे, जिन्होंने अवध क्षेत्र में विद्रोही ताकतों को कुचला था। 2. बरेली में रुहेलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, और इस क्षेत्र में विद्रोह को पूरी तरह समाप्त कर पुनः अधिकार प्राप्त करने का श्रेय ब्रिटिश अधिकारी जनरल कॉलिन कैंपबेल को जाता है। 3. इलाहाबाद में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने वहाँ के स्थानीय नागरिकों और सैनिकों का संगठन कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी, किंतु कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद में इस विद्रोह का दमन किया था। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने पचास हजार रुपए का इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा (पवैन के राजा) के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश भारतीय सेना में पुराने 'ब्राउन बेस' मस्कट के स्थान पर जिस नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, उसके कारतूस के आवरण को लोड करने से पहले दाँतों से काटना पड़ता था, और सैनिकों में यह प्रबल अफवाह फैल गई थी कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है। 2. चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में सबसे पहले बगावत का बिगुल बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को फूंका था, जिन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट मेजर हडसन पर आक्रमण कर उनकी हत्या कर दी थी। 3. बैरकपुर छावनी में हुई इस घटना के तुरंत बाद 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती देते हुए दिल्ली की ओर कूच कर गए। 4. मंगल पांडे द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध उठाए गए इस कदम के परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में फाँसी दे दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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