History of India
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मुगल कालीन प्रशासनिक संरचना और सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर ने अपने शासनकाल के 24वें वर्ष (1579-80) में राजा टोडरमल के सहयोग से 'दहसाला' (या 'आइंदा-साला') बंदोबस्त व्यवस्था लागू की, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और औसत प्रचलित मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का निर्धारण किया गया।
- 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दु-अस्पा' (दो घोड़े वाले) और 'सिंह-अस्पा' (तीन घोड़े वाले) की नई श्रेणी जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल सवार पद से दोगुनी या तिगुनी संख्या में घोड़े रखने होते थे, किंतु इसके लिए उनके 'जात' पद में कोई वृद्धि नहीं की जाती थी।
- 3. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी और जागीरदारी व्यवस्था के समन्वय हेतु 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत जागीर से होने वाली आय के आधार पर अधिकारियों के वेतन को 12 महीनों के बजाय आनुपातिक रूप से घटाकर तय किया जाता था क्योंकि जागीरों से वास्तविक आय निर्धारित जागीर-दावे से कम होने लगी थी।
- 4. औरंगजेब के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के भीतर दक्कन के अमीरों और मराठा सरदारों को बड़े पैमाने पर शामिल किए जाने के कारण 'जागीरदारी संकट' (Jagirdari Crisis) उत्पन्न हुआ, क्योंकि सम्राट के पास उपलब्ध 'खालसा' भूमि का क्षेत्रफल बढ़ने के बजाय जागीरों के आवंटन हेतु पर्याप्त भूमि की भारी कमी हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। अकबर द्वारा शुरू की गई 'दहसाला' व्यवस्था ने भू-राजस्व सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और जहांगीर ने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए 'दु-अस्पा' और 'सिंह-अस्पा' प्रणाली जोड़ी। शाहजहां के समय 'माहवार' प्रणाली लाई गई। किंतु कथन 4 गलत है क्योंकि औरंगजेब के समय दक्कनी सरदारों को मनसब देने के कारण खालसा भूमि का क्षेत्रफल *घट* गया था (न कि बढ़ गया था), जिससे जागीरों की भारी कमी हो गई और जागीरदारी संकट पैदा हुआ। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और…
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न…
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्होंने अफीम एजेंसी के एक अधिकारी डॉ. लायेल की हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर पीर अली समेत कई विद्रोहियों को सरेआम फाँसी पर लटका दिया गया था।
2. दानापुर छावनी (पटना के निकट) में 25 जुलाई 1857 को भारतीय सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुँच गए, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा में विद्रोह के प्रसार में स्थानीय सैनिकों, जमींदारों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, तथा इस क्षेत्र में विद्रोही गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कमिश्नर विलियम टेलर ने दमनकारी नीतियाँ अपनाई थीं।
4. बाबू वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी, किंतु अंत में उन्हें गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया जहाँ 1860 में उनकी जेल में मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों में लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) और लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के उत्तराधिकारियों को लाल किले से बेदखल करने की घोषणा ने भारतीय शासकों और राजपरिवारों के मन में गहरी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी थी।
2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में ब्रिटिश प्रशासन द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) शामिल था, जिसके तहत पैतृक संपत्ति से वंचित करने के पुराने हिंदू कानून को संशोधित कर धर्म-परिवर्तन करने वाले ईसाइयों को उनके पैतृक अधिकार से सुरक्षित रखा गया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में ईसाईकरण का भय व्याप्त हो गया।
3. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, जिससे पारंपरिक शिल्पकार, दस्तकार और भारी करों के बोझ तले दबे किसान साहूकारों के शिकंजे में फंस गए और विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
4. सेना के स्तर पर धार्मिक और सामाजिक असंतोष का मुख्य कारण वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) था, जिसके तहत नए सैनिकों के लिए समुद्र पार (Overseas) बर्मा या विदेशों में सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे पारंपरिक हिन्दू समाज में समुद्र पार यात्रा करने पर धर्म भ्रष्ट होने से जोड़कर देखा गया।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को नाना साहब ने विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश रेजिडेंट सर ह्यू व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, जिसके उपरांत 'सतीचौरा घाट' की घटना घटी।
2. नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार अजीमुल्ला खां थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन जुटाने के लिए ब्रिटेन की यात्रा की थी और बाद में विद्रोह के दौरान विद्रोही सेना का तोपखाना संभाला था।
3. कानपुर की पराजय के बाद नाना साहब ने नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उनके अंतिम दिनों का इतिहास अस्पष्ट है, जबकि उनके वफादार कमांडर तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया और सिंधिया की सेना को अपने पक्ष में कर लिया।
4. तात्या टोपे को अंततः ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल द्वारा सीधे युद्ध के मैदान में पराजित कर फाँसी दी गई थी, क्योंकि नेपाल की सीमा पर अंग्रेजों द्वारा उनके खिलाफ एक विशेष सैन्य अभियान चलाया गया था।
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के भारत में रणनीतिक विस्तार, कारखाना स्थापना तथा पुर्तगाली-डच ताकतों के साथ उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश कंपनी द्वारा भारत के पश्चिमी तट पर स्थापित किया जाने वाला पहला स्थायी कारखाना सूरत (1612) था, जिसे थॉमस बेस्ट द्वारा जहांगीर के शाही फरमान प्राप्त करने के उपरांत स्थापित किया गया था, जबकि पूर्वी तट पर पहला कारखाना मसूलीपट्टनम में 1611 में स्थापित किया गया था।
2. बॉम्बे (मुंबई) द्वीप ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को पुर्तगालियों से सीधे युद्ध में पराजित करने के उपरांत वर्ष 1661 में प्राप्त हुआ था, जिसे बाद में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने कंपनी को मात्र दस पाउंड वार्षिक किराए पर सौंप दिया था।
3. फ्रांसीसी गवर्नर जोसेफ फ्रांसिस डुप्ले द्वारा भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने की नीति से बहुत पूर्व, ब्रिटिश कंपनी के अधिकारी सर जॉन चाइल्ड ने औरंगजेब के साम्राज्य के विरुद्ध बॉम्बे और पश्चिमी तट पर नौसैनिक युद्ध (चाइल्ड का युद्ध) की शुरुआत की थी, जिसके कारण अंग्रेजों को मुगल सम्राट से क्षमा मांगने के लिए विवश होना पड़ा था।
4. बंगाल में ब्रिटिश व्यापारिक प्रभुत्व की वास्तविक नींव वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से पड़ी, जिसके तहत अंग्रेजों को बंगाल में मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले चुंगी-मुक्त व्यापार करने का अधिकार प्राप्त हुआ था।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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