History of India
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और आजाद हिंद फौज (INA) से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली और जयप्रकाश नारायण जैसे युवा समाजवादी नेताओं ने भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का नेतृत्व किया था और 'कांग्रेस रेडियो' का गुप्त प्रसारण किया था।
- 2. जापान के सहयोग से सिंगापुर में पुनर्गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) की कमान संभालने के उपरांत सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की घोषणा की थी।
- 3. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से बर्लिन रेडियो के माध्यम से वर्ष 1942 में अपने एक संबोधन के दौरान महात्मा गांधी को सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
- 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (Red Fort) में जो ऐतिहासिक मुकदमे चलाए गए, उसमें अभियुक्तों की पैरवी करने वाली मुख्य कानूनी रक्षा समिति (Defense Committee) के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी नेताओं ने भूमिगत गतिविधियों का संचालन किया। सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' की स्थापना की और जर्मनी से बर्लिन रेडियो पर गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' कहा। इसके अलावा, INA के ऐतिहासिक मुकदमों में भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में वकीलों की टीम ने बचाव किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में ब्रह्म समाज ने एकेश्वरवाद का समर्थन किया तथा मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' (Back to the Vedas) का नारा दिया तथा पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए शूद्रों और स्त्रियों के लिए वेदों के अध्ययन का अधिकार स्वीकार किया।
3. वर्ष 1875 में न्यूयार्क में स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' की संस्थापकों में मैडम एच.पी. ब्लावात्स्की और कर्नल एच.एस. ओल्काट शामिल थे, और इस संस्था का मुख्य मुख्यालय भारत में मद्रास के निकट अड्यार में स्थापित किया गया था।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग द्वारा 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना था, जबकि इसके प्रमुख प्रबुद्ध सदस्य महादेव गोविंद रानाडे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश संसद के नियंत्रण में आ गया, तथा गवर्नर-जनरल को 'वाइंसराय' (Viceroy) की नई उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
2. ब्रिटिश मंत्रिमंडल में भारत के प्रशासन की देखरेख के लिए 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया।
3. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी, उनके 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को समाप्त कर दिया गया तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय विस्तार (Annexation) की नीति का त्याग किया जाता है।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की संस्तुतियों को लागू करते हुए सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ा दिया गया तथा तोपखाने जैसे महत्वपूर्ण सैन्य विभागों को पूरी तरह भारतीय सैनिकों के नियंत्रण से बाहर रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों में लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) और लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के उत्तराधिकारियों को लाल किले से बेदखल करने की घोषणा ने भारतीय शासकों और राजपरिवारों के मन में गहरी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी थी।
2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में ब्रिटिश प्रशासन द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) शामिल था, जिसके तहत पैतृक संपत्ति से वंचित करने के पुराने हिंदू कानून को संशोधित कर धर्म-परिवर्तन करने वाले ईसाइयों को उनके पैतृक अधिकार से सुरक्षित रखा गया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में ईसाईकरण का भय व्याप्त हो गया।
3. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, जिससे पारंपरिक शिल्पकार, दस्तकार और भारी करों के बोझ तले दबे किसान साहूकारों के शिकंजे में फंस गए और विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
4. सेना के स्तर पर धार्मिक और सामाजिक असंतोष का मुख्य कारण वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) था, जिसके तहत नए सैनिकों के लिए समुद्र पार (Overseas) बर्मा या विदेशों में सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे पारंपरिक हिन्दू समाज में समुद्र पार यात्रा करने पर धर्म भ्रष्ट होने से जोड़कर देखा गया।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्होंने अफीम एजेंसी के एक अधिकारी डॉ. लायेल की हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर पीर अली समेत कई विद्रोहियों को सरेआम फाँसी पर लटका दिया गया था।
2. दानापुर छावनी (पटना के निकट) में 25 जुलाई 1857 को भारतीय सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुँच गए, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा में विद्रोह के प्रसार में स्थानीय सैनिकों, जमींदारों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, तथा इस क्षेत्र में विद्रोही गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कमिश्नर विलियम टेलर ने दमनकारी नीतियाँ अपनाई थीं।
4. बाबू वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी, किंतु अंत में उन्हें गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया जहाँ 1860 में उनकी जेल में मृत्यु हो गई थी।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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