History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जहाँगीर के शासनकाल में थॉमस रो और विलियम हॉकिंस भारत आए थे, और उसके शासनकाल में उस्ताद अहमद लाहौरी द्वारा ताजमहल का निर्माण कराया गया था।
- 2. शाहजहाँ के शासनकाल के उत्तरार्ध में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पा-सिंहस्पा' प्रथा की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत मनसबदारों को बिना अतिरिक्त जात पद बढ़ाए अधिक घोड़ों की सेना रखनी होती थी।
- 3. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को बंद करवा दिया था, संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था तथा झरोखा दर्शन और तौलने की प्रथा (तुलदान) जैसी जन-सम्मुख मुगल परंपराओं को समाप्त कर दिया था।
- 4. अकबर ने अपने शासनकाल के चौदहवें वर्ष में समस्त साम्राज्य में 'करोररी' नामक नए राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका मुख्य उद्देश्य प्रति क्रोड़ (दस लाख) दाम राजस्व एकत्र करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि उस्ताद अहमद लाहौरी शाहजहाँ के शासनकाल से जुड़े थे, जहाँगीर के काल से नहीं। जहाँगीर के काल में थॉमस रो और विलियम हॉकिंस आए थे। कथन 2 गलत है क्योंकि 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े-तीन घोड़े) प्रथा शाहजहाँ ने नहीं बल्कि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जहाँगीर द्वारा अपने मनसबदारों के सैन्य बल को बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। कथन 3 और 4 बिल्कुल सही हैं; औरंगजेब ने रूढ़िवादी नीतियों के तहत झरोखा दर्शन, तुलदान और सिक्कों पर कलमा खुदवाने पर रोक लगाई तथा संगीत को प्रतिबंधित किया, जबकि अकबर ने 1574 ई. (अपने शासन के 14वें वर्ष) में 'करोररी' प्रणाली की शुरुआत की थी।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई…
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया, किंतु लगड की दर इतनी अधिक थी कि शुरुआती वर्षों में ही लगभग आधी से अधिक जमींदारियाँ नीलामी के जरिए बिक गईं।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें राजस्व निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर 20 से 30 वर्षों के लिए निश्चित किया जाता था।
3. हॉल्ट मैकेंजी द्वारा प्रतिपादित और उत्तर प्रदेश, मध्य भारत तथा पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम (महाल) या ग्राम समुदाय के साथ सामूहिक रूप से किया जाता था।
4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों में किसानों पर कर का बोझ एक समान था, और तीनों ही व्यवस्थाओं में अकाल या फसल खराब होने की स्थिति में ब्रिटिश सरकार द्वारा लगान में पूर्ण स्थायी छूट देने का अनिवार्य वैधानिक प्रावधान किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों और रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने झाँसी के किले को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से वीरतापूर्वक मुकाबला किया और तात्या टोपे की सहायता से कालपी प्रस्थान किया, जहाँ संयुक्त सेना को ब्रिटिश सेना के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
2. कालपी में पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया, जिसे उन्होंने विद्रोही गतिविधियों का नया केंद्र बनाया।
3. ग्वालियर के पतन के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा तीव्र जवाबी हमला किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध ग्वालियर के रणक्षेत्र में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे ने वहाँ से निकलकर मध्य भारत और राजस्थान में लगभग एक वर्ष तक छापामार युद्ध का सफल नेतृत्व किया।
4. तात्या टोपे को युद्ध के मैदान में सीधे कभी बंदी नहीं बनाया जा सका था, बल्कि उनके एक विश्वासघाती जमींदार मित्र मानसिंह की धोखाधड़ी के कारण उन्हें सोते समय अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया और नरवर के जंगलों में संक्षिप्त सैन्य प्रक्रिया के बाद फाँसी दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य अभियानों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दानापुर छावनी के विद्रोही सैनिकों के आरा पहुँचने पर 25 जुलाई 1857 को बाबू वीर कुंवर सिंह ने क्रांतिकारियों का नेतृत्व संभाला और अपनी उम्र तथा स्वास्थ्य की परवाह किए बिना ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कई उल्लेखनीय रणनीतिक विजय प्राप्त कीं।
2. ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष के दौरान गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश कैप्टन डगलस की सेना से लोहा लेते हुए वीर कुंवर सिंह के बाएँ हाथ में गोली लग गई थी, जिसके संक्रमण से बचने के लिए उन्होंने स्वयं अपने हाथ को काटकर गंगा नदी को समर्पित कर दिया था।
3. बाबू वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार नहीं डाले, बल्कि उन्होंने कैमूर की पहाड़ियों से लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) जारी रखा और ब्रिटिश प्रशासन के समक्ष भारी चुनौती पेश की।
4. अमर सिंह को ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के मैदान में ही सीधे मार गिराया गया था, और उनके पतन के साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की सभी ज्वालाएँ पूरी तरह शांत हो गई थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र के अतिरिक्त जैन ग्रंथ 'उत्तराध्ययन सूत्र' में भी सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिसमें दक्षिण भारत में गोदावरी नदी घाटी में स्थित एकमात्र महाजनपद 'अश्मक' का उल्लेख है।
2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की निर्णायक भूमिका थी; इसकी पहली राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलमार्ग पर कड़ा नियंत्रण स्थापित हो गया।
3. बिम्बिसार ने हर्यक वंश की नींव रखते हुए वैवाहिक संबंधों की नीति और अंग राज्य की विजय के माध्यम से मगध के साम्राज्य विस्तार की शुरुआत की, किंतु उसके पुत्र अजातशत्रु ने अपने पिता की हत्या कर सिंहासन प्राप्त करने के बाद कभी भी वैशाली के वज्जी संघ के विरुद्ध सैन्य बल का प्रयोग नहीं किया था।
4. महाजनपद काल की राजनीतिक प्रणालियों में दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ प्रचलित थीं — राजतंत्र (Monarchy) और गणसंघ/संघीय प्रणाली (Republic/Oligarchy), जहाँ वज्जी और मल्ल जैसे प्रमुख गणसंघों में शासन सत्ता किसी एक राजा के पास न होकर कुल या गण के प्रतिनिधियों के हाथों में होती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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