History of India
Asked 4 hours ago · Viewed 0 times
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं और इन केंद्रों पर ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व 'मौलाना अहमदउल्लाह शाह' (डंका शाह) ने किया था, जिन्हें अंग्रेजों ने पकड़ने के लिए भारी इनाम घोषित किया था और अंततः कर्नल नील के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना ने फैजाबाद में इस विद्रोह का पूर्ण दमन किया।
- 2. बरेली में रोहिलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी 'खान बहादुर खान' ने विद्रोह की कमान संभाली थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य कार्रवाई कर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया।
- 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व 'مولवी लियाकत अली' (Maulvi Liaquat Ali) ने किया था, जहाँ कर्नल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोहियों का दमन किया और लियाकत अली को गिरफ्तार कर आजीवन काले पानी की सजा (अंडमान) दे दी गई।
- 4. अवध क्षेत्र में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने विद्रोही नेताओं और स्थानीय जनता को कुचलने के लिए सामूहिक फांसी और तोप से उड़ाने जैसी बर्बर नीतियों का व्यापक प्रयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलाना अहमदउल्लाह शाह ने जरूर किया था, किंतु फैजाबाद और लखनऊ के क्षेत्रों में विद्रोह का दमन जनरल नील द्वारा नहीं बल्कि मुख्य रूप से कैंपबेल और अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया था (जबकि कर्नल नील ने इलाहाबाद और बनारस में अत्यधिक क्रूरता से दमन किया था)। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं; बरेली में खान बहादुर खान ने मोर्चा संभाला जिसे कॉलिन कैंपबेल ने हराया, इलाहाबाद में लियाकत अली ने नेतृत्व किया जिन्हें बाद में आजीवन कारावास दिया गया, और विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ब्रिटिश सेना ने क्रूर दमन नीतियों का सहारा लिया था।
अगला प्रश्न →
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार…
← पिछला प्रश्न
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार (जगदीशपुर) में…
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोहियों के नेतृत्व तथा ब्रिटिश सेना द्वारा इन केंद्रों के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह की कमान मौलाना अहमदउल्लाह शाह (डंका शाह) ने संभाली थी, जिन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर कर्नल नील के नेतृत्व में फाँसी दे दी गई थी और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल ने इस केंद्र का दमन किया था।
2. बरेली में रोहिलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य कार्रवाई कर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जहाँ कर्नल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोहियों का दमन किया और बाद में लियाकत अली को गिरफ्तार कर आजीवन काले पानी की सजा दी गई।
4. अवध और रोहिलखंड क्षेत्र में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने विद्रोही नेताओं और स्थानीय जनता को कुचलने के लिए सामूहिक दंड, सार्वजनिक फांसी और तोप से उड़ाने जैसी बर्बर नीतियों का उपयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बैस' (Brown Bess) बंदूकों के स्थान पर नई 'एनफील्ड' (Enfield) राइफल को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न कर दिया था।
2. जनवरी 1857 में दमदम (Dum Dum) छावनी में एक भारतीय सिपाही ने नई राइफल के कारतूसों में चर्बी होने की बात पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह विवाद तेजी से बैरकपुर, बरहमपुर और मेरठ छावनियों तक फैल गया।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए अपने अंग्रेज अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बाथुर्स और लेफ्टिनेंट बॉग पर आक्रमण कर उनकी हत्या कर दी थी।
4. मंगल पांडे को इस कृत्य के लिए 18 अप्रैल 1857 को फांसी दिए जाने का आदेश निर्धारित था, किंतु ब्रिटिश अधिकारियों ने भारी जन-विद्रोह के भय से उन्हें तय तिथि से 10 दिन पूर्व ही 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में फांसी पर लटका दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बैस' (Brown Bess) बंदूकों के स्थान पर नई 'एनफील्ड' (Enfield) राइफल को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न कर दिया था।
2. जनवरी 1857 में दमदम (Dum Dum) छावनी में एक भारतीय सिपाही ने नई राइफल के कारतूसों में चर्बी होने की बात पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह विवाद तेजी से बैरकपुर, बरहमपुर और मेरठ छावनियों तक फैल गया।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए अपने अंग्रेज अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बाथुर्स और लेफ्टिनेंट बॉग पर आक्रमण कर उनकी हत्या कर दी थी।
4. मंगल पांडे को इस कृत्य के लिए 18 अप्रैल 1857 को फांसी दिए जाने का आदेश निर्धारित था, किंतु ब्रिटिश अधिकारियों ने भारी जन-विद्रोह के भय से उन्हें तय तिथि से 10 दिन पूर्व ही 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में फांसी पर लटका दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था और उसकी विभिन्न पुरातात्विक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के स्थलों में से केवल 'चन्हूदड़ो' ही एक ऐसा पुरास्थल था जो रक्षा प्राचीर (Fortification) से पूरी तरह रहित था, और यहाँ से मनके बनाने के कारखाने तथा वक्राकार ईंटों के साक्ष्य मिलते हैं।
2. बनावली से मिट्टी का बना हुआ 'हल' का प्रतिरूप (Terracotta plough) प्राप्त हुआ है, जो कृषि कार्यों में इस उपकरण के प्रयोग को प्रमाणित करता है, जबकि कालीबंगा से जुते हुए खेतों के साक्ष्य (Ploughed field) प्राप्त हुए हैं जिनकी जुताई ग्रिड पद्धति पर आधारित थी।
3. धौलाविरा नगर को सामान्यतः अन्य सैंधव स्थलों की तरह दो भागों (गढ और निचला नगर) में विभाजित न करके, तीन प्रमुख भागों — गढ, मध्यम नगर और निचला नगर — में विभाजित किया गया था, और यहाँ से एक अद्वितीय 'जल प्रबंधन प्रणाली' (Water Management System) के साक्ष्य मिले हैं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे की धातुकर्म तकनीक से पूरी तरह परिचित थे और लोथल तथा मोहनजोदड़ो से बड़े पैमाने पर लोहे के अस्त्र-शस्त्रों का उत्पादन किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
→
महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.