History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जहाँगीर के शासनकाल में थॉमस रो और विलियम हॉकिंस भारत आए थे, और इसी काल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्ण युग पर पहुँची थी, जिसमें पक्षियों और प्राकृतिक दृश्यों (नादिर-उल-असर उस्ताद मंसूर) का चित्रांकन विशेष रूप से उन्नत हुआ।
- 2. शाहजहाँ के शासनकाल को वास्तुकला का स्वर्ण युग कहा जाता है, किंतु इसी काल में दारा शिकोह द्वारा उपनिषदों का फारसी में अनुवाद 'सिह-ए-अकबर' (मंजुल-बहरीन) के नाम से कराया गया, जबकि औरंगजेब ने अपने शासनकाल में संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था और झरोखा दर्शन जैसी पुरानी परंपराओं को समाप्त कर दिया था।
- 3. अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान 1564 में जजिया कर को समाप्त कर दिया था, किंतु औरंगजेब ने 1679 ई. में इसे पुनः लागू कर दिया, जिससे साम्राज्य में गैर-मुस्लिम प्रजा के बीच भारी असंतोष उत्पन्न हुआ।
- 4. बाबर ने खानवा के युद्ध (1527) में राणा सांगा के विरुद्ध जिहाद का नारा दिया था और युद्ध जीतने के बाद 'गाजी' की उपाधि धारण की थी, तथा उसकी आत्मकथा 'तुझुक-ए-बाबरी' फारसी भाषा में लिखी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं, किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि बाबर की आत्मकथा 'तुझुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) मूल रूप से तुर्की (चगताई) भाषा में लिखी गई थी, न कि फारसी में (बाद में अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने इसका फारसी में अनुवाद किया था)। मुगल साम्राज्य के शासकों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के संबंध में विभिन्न…
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और…
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोहियों के नेतृत्व तथा ब्रिटिश सेना द्वारा इन केंद्रों के पुनरधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था, और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल ने इस केंद्र का अंततः दमन किया था।
2. बरेली में रोहिलखंड क्षेत्र के विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था, जिन्होंने अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य कार्रवाई कर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया।
3. इलाहाबाद में विद्रोह की कमान मौलवी लियाकत अली ने संभाली थी, जहाँ उन्होंने अल्पकालीन शासन स्थापित किया था, किंतु कर्नल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ इस विद्रोह का दमन किया तथा लियाकत अली बाद में नेपाल भागने में सफल रहे।
4. अवध, रोहिलखंड और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने सामान्य न्याय की प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए 'विद्रोहियों' और स्थानीय नागरिकों को तोप के मुँह से उड़ाने और सामूहिक फाँसी देने जैसी क्रूरतम सजाएँ दी थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, ताम्रलिक्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (वाई बी चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकारें थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश पहरे से निकलकर 'ग्रेट एस्केप' (Great Escape) किया और काबुल तथा मास्को के रास्ते बर्लिन पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और पहली बार जर्मनी में 'जय हिन्द' का नारा दिया तथा 'इंडियन लीजन' का गठन किया।
3. आजाद हिंद फौज (INA) का प्रथम प्रभाग (First Division) मोहन सिंह के नेतृत्व में जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों (POWs) से मार्च 1942 में टोक्यो सम्मेलन के निर्णयों के तहत गठित किया गया था, किंतु जापानी सैन्य अधिकारियों के साथ मतभेदों के कारण मोहन सिंह को पद से हटा दिया गया था।
4. सिंगापुर में रास बिहारी बोस के आमंत्रण पर पहुँचे सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1943 में 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की बागडोर संभाली और 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में 'आज़ाद भारत की अनंतिम सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की घोषणा की, जिसे धुरी राष्ट्रों (Germany, Japan, Italy) द्वारा तुरंत मान्यता दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज़ द्वारा झाँसी की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ किले की रक्षा की, और तात्या टोपे द्वारा पेशवा के नेतृत्व में झाँसी को मुक्त कराने के लिए लाई गई राहत सेना को ह्यूरोज़ ने बेतवा के युद्ध में पराजित कर दिया।
2. झाँसी के पतन के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे कालपी में मिले, जहाँ अंग्रेजों के विरुद्ध संयुक्त रूप से संघर्ष करने की रणनीति बनाई गई, किंतु कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद दोनों ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया शासक को परास्त कर ग्वालियर के दुर्ग पर अधिकार कर लिया।
3. ग्वालियर के पतन के बाद ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज़ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्वालियर पर पुनः आक्रमण किया, जहाँ मोरा के युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से सुरक्षित निकलकर नेपाल की पहाड़ियों में चले गए जहाँ उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका।
4. तात्या टोपे ने ग्वालियर के पतन के पश्चात राजस्थान और मध्य भारत के जंगलों में छिपकर गोरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया, किंतु उनके एक स्थानीय विश्वासघाती जमींदार मानसिंह के धोखे दिए जाने के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया और अंततः शिवपुरी में उन्हें फाँसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना था।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 ई. में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक और सामरिक केंद्र बनाया तथा सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया।
3. नूनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया तथा 1534 ई. में बेसिन और 1535 ई. में दीव के क्षेत्रों को गुजरात के शासक बहादुर शाह से समझौते के तहत प्राप्त किया।
4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर में जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करने और कर वसूलने के लिए 'कार्टाज-अर्मडा' व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत मुगल सम्राट अकबर और शाहजहाँ जैसे शासकों को भी पुर्तगालियों से कार्टाज (परमिट) खरीदना पड़ता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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