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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस सभ्यता की लिपि चित्रात्मक (Pictographic) थी, जिसे 'बौस्ट्रोफेडन' (Boustrophedon) शैली में लिखा जाता था, जिसमें पहली लाइन दाईं से बाईं ओर और दूसरी लाइन बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी, और इस लिपि को अब तक पूरी तरह पढ़ा जा चुका है।
  2. 2. लोथल एक प्रमुख हड़प्पाकालीन बंदरगाह (Dockyard) नगर था, जहाँ से चावल के साक्ष्य (धान की भूसी), फारस की मुहरें और मनके बनाने के कारखाने के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  3. 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'नर्तकी की कांस्य मूर्ति' (Dancing Girl) 'लॉस्ट वैक्स' (Cire Perdue / Lost-wax casting) मोम-लोपन तकनीक से बनाई गई थी, जो इस सभ्यता के उच्च धातु-शिल्प कौशल का प्रमाण है।
  4. 4. सिंधु घाटी सभ्यता के किसी भी स्थल से मंदिर या किसी बड़े धार्मिक पूजा-स्थल के स्पष्ट और पुख्ता अवशेष नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यहाँ का शासन पुरोहित वर्ग के हाथों में न होकर मुख्य रूप से व्यापारियों या सेक्युलर ताकतों के नियंत्रण में था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए कथनों में से कथन 1 असत्य है, क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि चित्रात्मक और 'बौस्ट्रोफेडन' शैली की अवश्य थी, किंतु इस लिपि को **अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है**। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। लोथल से बंदरगाह, चावल के साक्ष्य और मनके बनाने के कारखाने मिले हैं; मोहनजोदड़ो की कांस्य नर्तकी 'लॉस्ट वैक्स' तकनीक से निर्मित है; तथा यहाँ से किसी भी मंदिर के अवशेष नहीं मिले हैं। इस सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अगला प्रश्न → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और… ← पिछला प्रश्न वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित…

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