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History of India
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तुगलक काल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांस्कृतिक समन्वय का सबसे बड़ा उदाहरण क्या था?

Detailed Explanation

सूफी और भक्ति संत सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रहे थे।
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→ 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस्स कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और राज्य के प्रशासनिक तथा सैन्य संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित परिषद का गठन किया था। 2. चिनहट के युद्ध (30 जून 1857) में बेगम हजरत महल के वफादार सैनिकों और विद्रोही सिपाहियों की संयुक्त सेना ने हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी। 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र जिहाद का आह्वान किया और चिनहट तथा लखनऊ के अन्य मोर्चों पर अंग्रेजी सेना को कड़ी टक्कर दी, जिस कारण अंग्रेजों ने उन पर भारी इनाम घोषित किया था। 4. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना के सामने अंततः आत्मसमर्पण कर दिया था और अपने जीवन के अंतिम दिन कलकत्ता में बिताए थे, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर फैजाबाद में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "परगना" का अधिकारी: → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सैनिकों को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित करने का निर्णय उत्तर-पश्चिम की मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा और साम्राज्य के केंद्रीय भाग में स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिया था। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार सिंचाई के लिए नहरों का एक बड़ा जाल बनवाया और किसानों पर से सभी प्रकार के सिंचाई कर (शरब) पूरी तरह से समाप्त कर दिए। 4. इल्तुतमिश ने सल्तनत की वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 'इक्ता' प्रणाली को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नगद वेतन के बदले प्रशासनिक क्षेत्रों (इक्ता) से भू-राजस्व एकत्रित करने का अधिकार दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के गुण अनंतिम होते हैं, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (हेतुवाद) सिद्धांत के अनुसार समस्त ब्रह्मांड की वस्तुएं और घटनाएं परस्पर कारणों और प्रभावों की श्रृंखला से जुड़ी हुई हैं तथा कोई भी वस्तु स्वतंत्र या नित्य नहीं है। 2. महावीर स्वामी द्वारा जैन संघ की स्थापना पावापुरी में की गई थी, और उनकी मृत्यु (निर्वाण) के पश्चात जैन संघ का प्रथम थेर (अध्यक्ष) सुधर्मन बना था, क्योंकि उनके अन्य ग्यारह गणधरों में से केवल सुधर्मन ही महावीर के जीवनकाल और उनकी मृत्यु के समय जीवित बचे थे। 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' की परिकल्पना की गई है, जिन्हें संसार के उद्धार के लिए इस पृथ्वी पर आने वाले अंतिम बुद्ध के रूप में स्वीकार किया गया है, जबकि हीनयान (स्थविरवाद) संप्रदाय केवल सिद्धार्थ गौतम को ही एकमात्र बुद्ध मानता है। 4. जैन दर्शन में कर्म के बंधन से मुक्ति के लिए संथारा (या संलेखना) पद्धति का विधान है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी इच्छा से उपवास के माध्यम से शरीर का त्याग करता है, और इसी विधि के तहत मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने श्रवणबेलगोला में अपने प्राण त्यागे थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में भारत के किस क्षेत्र से सर्वोत्तम "मलमल" का निर्यात होता था?
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