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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूधहोग (दोहने का कार्य) करती थी, तथा इस काल में 'नियोग' प्रथा और विधवा विवाह के प्रचलन के साक्ष्य मिलते हैं।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में तांबे (लोहित अयस) के साथ-साथ 'अयस' शब्द का प्रयोग लोहे के अर्थ में भी होने लगा था, जिसे शतपथ ब्राह्मण में 'श्याम अयस' या 'कृष्ण अयस' कहा गया है।
  3. 3. ऋग्वेद के नदी सूक्त में अफगानिस्तान की कभा (काबुल), सुवास्तु (स्वात), क्रुमु (कुर्रम) और गोमती (गोमल) नदियों का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि आर्यों का संपर्क केवल सप्त सैंधव क्षेत्र तक ही सीमित नहीं था बल्कि उनका विस्तार उत्तर-पश्चिम सीमांत तक था।
  4. 4. वैदिक कालीन दार्शनिक व्यवस्था में 'षड्दर्शन' (छह आस्तिक दर्शन) का विकास हुआ, जिसके अंतर्गत कपिल मुनि द्वारा रचित 'न्याय दर्शन' और कणाद मुनि द्वारा रचित 'वैशेषिक दर्शन' भौतिकवादी और परमाणुवादी विचारों के प्रणेता माने जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ऋग्वैदिक समाज में 'दुहितृ' का शाब्दिक अर्थ गाय दोहने वाली से है और इस काल में नियोग प्रथा, पुनर्विवाह तथा सभा एवं समिति जैसी संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के साक्ष्य मिलते हैं। कथन 2 सही है: उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज हो चुकी थी जिसे शतपथ ब्राह्मण में 'कृष्ण अयस' या 'श्याम अयस' कहा गया है, जबकि तांबे को 'लोहित अयस' कहा जाता था। कथन 3 सही है: ऋग्वेद के नदी सूक्त (दसवें मंडल) में अफगानिस्तान की नदियों (कभा, क्रुमु, गोमती, सुवास्तु) का उल्लेख मिलता है, जो आर्यों के भौगोलिक विस्तार को स्पष्ट करता है। कथन 4 गलत है: कपिल मुनि द्वारा 'सांख्य दर्शन' (न कि न्याय दर्शन) की रचना की गई थी, जबकि न्याय दर्शन के प्रणेता महर्षि गौतम हैं। सांख्य दर्शन भारत के सबसे प्राचीन दर्शनों में से एक है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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