BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
28 views

फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल के सबसे प्रामाणिक इतिहासकार कौन थे?

Detailed Explanation

अफीफ ने फिरोज शाह का इतिहास लिखा।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य एवं रणनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में अंग्रेजों द्वारा उनकी पेंशन रोके जाने और डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स (राज्य हड़प नीति) के तहत उपाधियों के अस्वीकार किए जाने के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी की थी और क्रीमिया युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैन्य कमजोरियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर भारतीय विद्रोह की योजना को वैचारिक आधार दिया था। 3. कानपुर में ब्रिटिश समर्पण के पश्चात जनरल नील द्वारा भारतीय नागरिकों और कैदियों पर ढाए गए अमानवीय अत्याचारों के प्रतिकार के रूप में 'बीबीघर नरसंहार' की घटना घटी, जिसके उपरांत तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा में असफल होने पर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर और कालपी के मोर्चे पर ब्रिटिश सेना के खिलाफ अत्यंत कुशल गोरिल्ला युद्ध का संचालन किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके विशिष्ट योगदानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद के प्रचार तथा मूर्तिपूजा और जातिगत कठोरताओं का पुरजोर विरोध किया, किंतु ब्रह्म समाज ने वेदों को पूरी तरह अपौरुषेय (ईश्वर प्रदत्त) मानने से इनकार कर दिया था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए मध्यकालीन पौराणिक मान्यताओं, अवतारवाद और मूर्तिपूजा का खंडन किया, साथ ही शूद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू धर्म से धर्मांतरित व्यक्तियों की वापसी का समर्थन किया। 3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के भीतर हुए पहले विभाजन के बाद देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' का गठन किया, जबकि केशव चंद्र सेन ने वर्ष 1878 में 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की जो बाल विवाह के विरुद्ध अत्यंत प्रगतिशील और कठोर दृष्टिकोण रखता था। 4. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा की गई थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, और इसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा दलित जातियों के उत्थान के लिए कार्य करना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेशानुसार गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वीं, 8वीं और 40वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुँच गए, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना के विरुद्ध अभियान में सहयोग किया। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय राजाओं, ज़मींदारों और विद्रोही सिपाहियों ने कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, क्योंकि यहाँ के लोग ब्रिटिश प्रशासन के प्रति पूर्णतः निष्ठावान बने रहे थे। 4. कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना में विद्रोह को कुचलने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा लिया और कई प्रमुख मुस्लिम नागरिकों तथा विद्रोही नेताओं को बिना किसी निष्पक्ष मुकदमे के मौत के घाट उतार दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम 'महामल्ल' के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया गया था, जबकि कांचीपुरम के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने करवाया था। 2. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित ऐहोल शिलालेख (प्रशस्ति) में प्राप्त होता है। 3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जिसका विस्तृत उल्लेख उत्तरमेरूर अभिलेखों में मिलता है, के अंतर्गत ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (घड़े की पर्ची) नामक लोकतांत्रिक लॉटरी प्रणाली का प्रयोग किया जाता था। 4. हर्ष के कन्नौज धर्मसभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चीनी यात्री ह्वेनसांग को सभा का अध्यक्ष बनाया गया था, किंतु ह्वेनसांग की इस सर्वोच्च धार्मिक स्थिति से ईर्ष्यावश हीनयानियों और ब्राह्मणों ने सभा के पंडाल में आग लगाने का असफल षड्यंत्र रचा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "कारखाना" (Karkhana) क्या था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.