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History of India
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इब्न बतूता के अनुसार, मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में कितने "वजीर" होते थे?

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इब्न बतूता ने चार वजीरों का उल्लेख किया है।
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Related Questions

→ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर रहकर क्रमिक सुधार और स्वशासन प्राप्त करना था, जिसके लिए उन्होंने मुख्य रूप से '3P' (Prayer, Petition और Protest) की पद्धति पर भरोसा किया। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरुप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज की भव्य धर्मसभा और प्रयाग के महामक्षपर्षद् (महामोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में विस्तृत वर्णन किया है। 2. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) के काल में करवाया गया था, और ये सभी मंदिर एकात्म पत्थर (Monolithic rock) को तराशकर बनाए गए वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। 3. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका प्रत्यक्ष ऐतिहासिक साक्ष्य पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल शिलालेख (जिसे रविचर्ति ने संस्कृत में लिखा है) में मिलता है। 4. तंजौर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविण वास्तुकला की नागर शैली का एक प्रमुख और प्रारंभिक उदाहरण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक तथा सामाजिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म एकमात्र सत्य (परम सत्य) है और जगत मिथ्या है, जिसका खंडन करते हुए रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार ईश्वर, जीव और जगत पृथक होते हुए भी एक-दूसरे से उसी प्रकार जुड़े हैं जैसे किरणें सूर्य से। 2. सूफी संतों के सिलसिले (संप्रदाय) मुख्य रूप से दो भागों में बंटे थे—'बा-शरा' (जो इस्लामिक शरिया कानून के नियमों का सख्ती से पालन करते थे, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (जो शरिया के बंधनों से मुक्त मस्तों या कलंदरों की तरह जीवन जीते थे)। 3. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, जबकि इस सिलसिले के प्रसिद्ध संत निजामुद्दीन औलिया ने सात सुल्तानों का शासनकाल देखा था, किंतु उन्होंने कभी भी किसी सुल्तान के दरबार में जाना स्वीकार नहीं किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रम और उनके वैचारिक तथा सामाजिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा पद्धति' के तहत अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती करने का दबाव डाला जा रहा था, और इस आंदोलन की सफलता से प्रेरित होकर महात्मा गांधी ने भारत में पहली बार सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग किया था। 2. चंपारण जाँच समिति के एक सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा वापस करने का सफल समझौता कराया था। 3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लिए जाने के निर्णय से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी। 4. असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ ब्रिटिश संसद और अदालतों का बहिष्कार करने का भी खुला आह्वान किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय का दोहन करने वाली पुत्री से था, तथा इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार, वेदों के अध्ययन और सभा एवं समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने का अधिकार प्राप्त था। 2. उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था एक संस्था के रूप में स्थापित हुई, जिसका मूल अर्थ 'वह स्थान जहाँ समूचे कुल का गोधन पाला जाता था' था, किंतु इस काल आते-आते गोत्र के अंतर्गत अंतर्गोत्र विवाह (Exogamy) पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया। 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा का उल्लेख है, जो आर्यों के उत्तर भारत से सदाानीरा (गंडक) नदी के पार पूर्व दिशा की ओर विस्तार को दर्शाती है। 4. ऋग्वेद में उल्लिखित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कबीले के राजा सुदास ने त्रित्सु और अन्य दस कबीले के संघ को पराजित किया था, और इस युद्ध में विश्वामित्र ने सुदास का पुरोहित के रूप में साथ दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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