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History of India
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1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह को दबाए गए क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जॉन निकलसन — दिल्ली
  2. 2. कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ
  3. 3. जेम्स आउट्राम — अवध
  4. 4.

ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

1857 के महान विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने सबसे अनुभवी सैन्य अधिकारियों को तैनात किया था। जॉन निकलसन ने कड़े संघर्ष के बाद दिल्ली पर पुनः अधिकार किया था (इस दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई)। सर कॉलिन कैंपबेल ने कानपुर और लखनऊ में विद्रोह को दबाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। सर जेम्स आउट्राम ने हेनरी लॉरेंस और कैंपबेल के साथ मिलकर अवध और लखनऊ क्षेत्र में सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था। इसके अतिरिक्त, सर ह्यूरोज ने मध्य भारत में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाया था। इस प्रकार दिए गए सभी युग्म सही सुमेलित हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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→ वैदिक साहित्य और उनके दार्शनिक तथा अनुष्ठानिक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वेद के सूक्तों का पाठ करने वाले पुरोहित को 'होतृ' कहा जाता था, जबकि यजुर्वेद के कर्मकांडीय और यज्ञीय मंत्रों का सस्वर उच्चारण या पाठ करने वाले पुरोहित को 'अध्वर्यु' कहा जाता था जो यज्ञ की भौतिक वेदियों का निर्माण भी करता था। 2. आरण्यकों की रचना मुख्य रूप से वनों में एकांत साधना करने वाले मुनियों और संन्यासियों के लिए की गई थी, जिनमें यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर दार्शनिक चिंतन, प्रतीकात्मक अर्थ और रहस्यवादी विचारों की प्रधानता मिलती है। 3. उपनिषदों को 'वेदांत' भी कहा जाता है क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं, और इनमें मुख्य रूप से बहुदेववाद तथा भौतिकवादी सुख-सुविधाओं के अनुष्ठानों का प्रबल समर्थन किया गया है। 4. वैदिक काल में प्रयुक्त 'अघ्न्या' (न मारे जाने योग्य) शब्द का प्रयोग गाय के लिए किया गया है, और वैदिक अर्थव्यवस्था में गाय विनिमय का प्रमुख साधन तथा संपत्ति का सबसे बड़ा प्रतीक थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के उदय के वैचारिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश राज द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के माध्यम से हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के पुराने प्रावधान को समाप्त कर दिया गया, जिससे पारंपरिक रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हुई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर धर्म परिवर्तन को बढ़ावा दे रही है। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों और मुक्त व्यापार (Free Trade) के एकतरफा प्रभावों के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे लाखों कारीगर बेरोजगार होकर पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हो गए और भूमि पर भू-राजस्व का अत्यधिक दबाव बढ़ गया। 3. लॉर्ड डलहौजी द्वारा अपनाए गए 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सतारा, जैतपुर, संबलपुर और उदयपुर के साथ-साथ वर्ष 1856 में अवध का विलय 'कुशासन के आरोप' के आधार पर कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप अवध के हजारों विस्थापित सैनिक और पारंपरिक अभिजात वर्ग बेरोजगार हो गए तथा ब्रिटिश विरोधी आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी। 4. सैन्य कारणों के अंतर्गत वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत सेना में नए रंगरूठों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेश सेवा) जाकर युद्ध करना अनिवार्य कर दिया गया, जिसे तत्कालीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जाति और धर्म का हनन माना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/संस्थाओं के वैधानिक एवं वैचारिक योगदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने केवल धार्मिक पुनरुत्थान पर ही बल नहीं दिया, बल्कि व्यावहारिक वेदांत (Practical Vedanta) के सिद्धांत को अपनाते हुए मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म माना और आधुनिक पश्चिमी विज्ञान तथा शिक्षा के प्रसार का समर्थन किया। 2. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' (Truth-seekers' Society) ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और पुरुष-प्रधान समाज की कठोर आलोचना करते हुए शूद्रों, अतिशूद्रों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' के माध्यम से जाति व्यवस्था की निर्ममता को उजागर किया। 3. गोपाल गणेश आगरकर और बालगंगाधर तिलक द्वारा पुणे में स्थापित 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' (1884) और 'फर्ग्यूसन कॉलेज' का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं में राष्ट्रवादी चेतना के साथ-साथ पाश्चात्य उदारवादी शिक्षा का प्रसार करना था, हालाँकि सामाजिक सुधारों की प्राथमिकताओं को लेकर आगरकर और तिलक के मध्य वैचारिक मतभेद भी रहे थे। 4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के कानूनी वैधता के लिए अथक प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में वर्ष 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' पारित हुआ, किंतु उन्होंने बाल विवाह और बहुविवाह प्रथा का समर्थन किया था क्योंकि वे प्राचीन परंपराओं में हस्तक्षेप के विरोधी थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण के प्रमुख संगठनों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसका नाम 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें पहली बार समाजवाद को संगठन के आधिकारिक लक्ष्य के रूप में जोड़ा गया था। 2. साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाहौर में लाला लाजपत राय पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के प्रतिशोध में भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद ने 17 दिसंबर 1928 को अंग्रेज पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 3. वर्ष 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' के विरोध में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका, और उनका उद्देश्य किसी को आहत करना नहीं बल्कि 'बहरे कानों तक अपनी आवाज पहुँचाना' तथा गिरफ्तारी देकर अदालत के मंच का उपयोग अपने क्रांतिकारी विचारों के प्रचार के लिए करना था। 4. चटगांव शस्त्रागार लूट कांड (1930) का नेतृत्व करने वाले सूर्य सेन (जिन्होंने 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी - चटगांव शाखा' का गठन किया था) ने युवाओं को मार्क्सवादी और समाजवादी विचारधारा से जोड़ते हुए अपनी पूरी सैन्य कार्रवाई में महिलाओं को शामिल करने से पूरी तरह से वर्जित रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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