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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत गति के नियमों, कार्य, ऊर्जा और संवेग संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी संरक्षी बल (Conservative force) के प्रभाव में किसी वस्तु पर कार्य किया जाता है, तो किया गया कार्य वस्तु के पथ पर निर्भर करता है और इस प्रक्रिया में यांत्रिक ऊर्जा हमेशा घटती है।
- 2. संवेग संरक्षण का सिद्धांत (Conservation of Momentum) न्यूटन के द्वितीय और तृतीय गति दोनों नियमों का संयुक्त परिणाम है, जो किसी विलगित निकाय (Isolated system) पर लागू होता है।
- 3. जब कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाता है, तो केंद्रीय गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा उपग्रह पर किया गया कार्य हमेशा शून्य होता है क्योंकि बल की दिशा विस्थापन की दिशा के लंबवत होती है।
- 4. गतिज ऊर्जा और रैखिक संवेग के बीच संबंध के अनुसार, यदि किसी वस्तु का रैखिक संवेग दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संरक्षी बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत किया गया कार्य वस्तु द्वारा तय किए गए पथ पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस स्थिति में यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है। कथन 2 सत्य है; संवेग संरक्षण का नियम न्यूटन के गति के नियमों पर आधारित है और विलगित निकाय के लिए मान्य है। कथन 3 सत्य है क्योंकि केंद्रीय बल हमेशा वृत्ताकार या दीर्घवृत्ताकार कक्षा में त्रिज्या के अनुदिश (केंद्र की ओर) कार्य करता है, जो तात्कालिक विस्थापन के लंबवत होता है, जिससे किया गया कार्य शून्य होता है। कथन 4 सत्य है, क्योंकि गतिज ऊर्जा ($K = rac{p^2}{2m}$) संवेग के वर्ग के समानुपाती होती है, अतः संवेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मानव शरीर के तंत्रों की जटिल कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर…
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द्रवों के यांत्रिक गुणों (पृष्ठ तनाव, श्यानता और…
Related Questions
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हार्मोन्स की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटेटिन' हार्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) के स्रावण को प्रेरित करता है, जबकि 'ग्रोथ हार्मोन रिलीजिंग हॉर्मोन' (GHRH) इसके स्रावण को संदमित करता है।
2. थायराइड ग्रंथि की फोलिक्युलर कोशिकाओं द्वारा उत्पादित थायॉक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) हार्मोन्स बेसल चयापचय दर (BMR), एरिथ्रोपोइएसिस और शरीर के ऊतकों में ऑक्सीजन की खपत को नियंत्रित करते हैं।
3. अधिवृल्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मेडुला भाग 'कैटेकोलामाइन्स' (एपिलीनफ्राइन और नोरएपिलीनफ्राइन) का स्रावण करता है, जिन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' या 'फ्लाइट या फाइट हार्मोन' भी कहा जाता है, जो तनाव की स्थिति में अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के प्रभाव को बढ़ाते हैं।
4. अग्नाशय के लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की 'अल्फा कोशिकाएँ' इंसुलिन का स्रावण करती हैं जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है, जबकि 'बीटा कोशिकाएँ' ग्लूकागोन का स्रावण करती हैं जो ग्लाइकोजनोलिसिस को प्रेरित कर रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बोर के परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model) की सीमाओं, सम, अर्द्ध और पूर्ण भरे हुए कक्षकों के स्थायित्व तथा क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोर का परमाणु मॉडल केवल उन स्पीशीज़ पर सफलताપૂર્વक लागू होता है जिनमें केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है (जैसे $H$, $He^+$, $Li^{2+}$), और यह बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम में 'ज़ीमैन प्रभाव' (Zeeman effect) तथा 'स्टार्क प्रभाव' (Stark effect) की व्याख्या करने में असमर्थ रहा है।
2. विनिमय ऊर्जा (Exchange Energy) के कारण, अर्द्ध-पूरित (Half-filled) और पूर्ण-पूरित (Fully-filled) उपकोशों के इलेक्ट्रॉन अधिक सममित रूप से वितरित होते हैं, जिससे उनकी कुल ऊर्जा न्यूनतम और स्थायित्व अधिकतम होता है।
3. मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) और दिगंशी क्वांटम संख्या ($l$) के मानों के आधार पर किसी बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में कक्षकों की ऊर्जा का निर्धारण 'आफबाऊ सिद्धांत' (Aufbau principle) के अंतर्गत 'n + l नियम' द्वारा किया जाता है, जिसके अनुसार जिस कक्षक के लिए ($n + l$) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा अधिक होती है।
4. पावली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) यह निर्धारित करता है कि किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम नहीं हो सकता, और एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Opposite spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuits) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध (Resistance) उसकी लंबाई के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा चालक की विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) केवल पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करती है, उसकी ज्यामितीय आकृतियों पर नहीं।
2. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series Combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के योग से अधिक होता है, और परिपथ के प्रत्येक भाग से बहने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
3. किरचॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में तब होता है जब गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता है, जिससे $P/Q = S/R$ का संबंध प्राप्त होता है।
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पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की बूंद के भीतर का अतिरिक्त दाब ($P$) उसके पृष्ठ तनाव ($T$) और त्रिज्या ($R$) से समीकरण $P = rac{2T}{R}$ द्वारा संबंधित होता है, जबकि एक वायु के बुलबुले के भीतर अतिरिक्त दाब $P = rac{4T}{R}$ होता है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का SI मात्रक पास्कल-सेकंड ($Pa \cdot s$) होता है, और तापमान में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घटती है जबकि गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के द्रव्यमान के बराबर आभासी भार में कमी का अनुभव करती है।
4. केशिकत्व (Capillarity) की परिघटना में, किसी केशिका नली में द्रव के ऊपर चढ़ने या नीचे उतरने की ऊँचाई नली की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है, बशर्ते संपर्क कोण और द्रव का घनत्व नियत रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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