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History of India
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सल्तनत काल में सिंचाई हेतु "नहरों का सबसे बड़ा जाल" बिछाने का श्रेय किसे जाता है?

Detailed Explanation

फिरोज शाह तुगलक को नहरों के सबसे बड़े जाल के निर्माण का श्रेय जाता है।
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→ मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की राजस्व प्रणाली काफी हद तक मलिक अंबर द्वारा डेक्कन के सुल्तानों के अधीन अपनाई गई भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसमें भूमि की पैमाइश और उत्पादकता के आकलन के बाद उपज का दो-fifths हिस्सा राज्य द्वारा कर के रूप में निर्धारित किया गया था। 2. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के बाह्य कर थे; जहाँ चौथ पड़ोसी गैर-मराठा क्षेत्रों से संभावित आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत कर था, वहीं सरदेशमुखी 10 प्रतिशत का एक अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी अपने पैतृक अधिकारों के दावे के आधार पर वसूलते थे। 3. शिवाजी के सैन्य प्रशासन में 'पागा' घुड़सवार सेना राज्य द्वारा सीधे तौर पर सुसज्जित और वेतनभोगी होती थी, जबकि 'सिलाहदार' घुड़सवार वे सैनिक होते थे जो अपने खुद के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में शामिल होते थे और उन्हें इसके बदले राज्य से नियमित भत्ता मिलता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → फ्रांसीसी यात्री बर्नियर और टैवर्नियर किसके शासनकाल में भारत आए थे? → मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और भू-राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' पूरी तरह से वंशानुगत थी, जिसमें मनसबदार का पद उसके ज्येष्ठ पुत्र को ही स्वतः प्राप्त होता था और जात एवं सवार का निर्धारण उसके व्यक्तिगत घोड़े की नस्ल के आधार पर किया जाता था। 2. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'सिंहोस्पा' (दो-अस्पा-सिंह-अस्पा) जैसी नई उप-श्रेणियाँ जोड़ी गईं, जिसके तहत बिना जात रैंक बढ़ाए ही सवार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी। 3. राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके औसत बाजार मूल्य का सर्वेक्षण कर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था। 4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में जागीरदारी संकट (Jagirdari Crisis) और किसानों के भारी विद्रोह के कारण उत्पन्न आर्थिक अस्थिरता के परिणामस्वरूप जागीर की कमी (बेजागीरी) की समस्या गंभीर हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल को 'वाइरॉय' (Viceroy) की अतिरिक्त उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वाइसराय बने। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उनके विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया जाता है। 3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और बिना किसी नस्लीय या धार्मिक भेदभाव के लोक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर नियुक्त करने का स्पष्ट वचन दिया गया था, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने शत-प्रतिशत ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया था। 4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा बंगाल की सेना में जातियों और क्षेत्रों के संतुलन के तहत 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → महात्मा गांधी के प्रारंभिक भारतीय सत्याग्रहों — चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने तिनकथा प्रणाली के विरोध में आवाज उठाई थी, जिसमें किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना आवश्यक था। 2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल के पूर्ण रूप से बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने पर गांधीजी ने किसानों का नेतृत्व किया, जहाँ वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने उनके प्रमुख सहयोगियों के रूप में कार्य किया। 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा असहयोग के प्रस्ताव की पुष्टि की गई, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के साथ-साथ अदालतों, स्कूलों और विधान परिषदों के त्याग का आह्वान किया गया था। 4. चौरी-चाचौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के उपरांत बारडोली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसका उस समय देश के सभी युवा और वरिष्ठ नेताओं ने बिना किसी मतभेद के पूर्ण समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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