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History of India
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ज्वालामुखी मंदिर से लूटे गए संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद "दलायल-ए-फिरोजशाही" के नाम से किसने किया था?

Detailed Explanation

अजीजुद्दीन खालिद ने इन ग्रंथों का अनुवाद किया था।
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→ वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक एवं राजनीतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करना था, जिसमें बीस राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था। 2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बाद शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, तथा उन्होंने महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (Monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। 3. वातापी के चालुक्य वंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव और विस्तृत विवरण ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी। 4. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली (विशेषकर उत्तरमेरूर शिलालेखों में वर्णित) के अनुसार, ग्राम सभाओं के सदस्यों का चयन 'कुदोलवराय' (पर्ची निकालकर मतदान) नामक एक पारदर्शी लाटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाता था, और इसके लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा के साथ-साथ वेद-वेदांगों का ज्ञान अनिवार्य था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास, संघ की संरचना तथा उनके अनुष्ठानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघ (निर्ग्रंथ) में दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों के अंतर्गत महिलाओं के लिए दीक्षा का द्वार प्रारंभ से ही पूर्ण रूप से खुला हुआ था और उन्हें मोक्ष प्राप्ति का समान अधिकार था। 2. बौद्ध धर्म के विपरीत, जैन धर्म ने जीवन की उत्पत्ति और कर्म सिद्धांत में कठोर तपस्या तथा संलेखना (संथारा) पद्धति को सर्वोच्च स्थान दिया, जिसके माध्यम से शरीर का अंत करना जैन दर्शन में आत्मकल्याण का एक वैध मार्ग माना गया है। 3. बौद्ध धर्म के 'प्रतिमार्ग' (मध्यम मार्ग) में वेदों की प्रामाणिकता को पूर्णतः अस्वीकार किया गया, किंतु महात्मा बुद्ध ने आत्मा (अत्ता/आत्मन्) के अस्तित्व को सिरे से नकारते हुए अनात्मवाद का सिद्धांत प्रतिपादित किया, जबकि जैन धर्म आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा दांडी मार्च के दौरान नमक कानून तोड़े जाने के साथ हुई थी, जिसमें कराची अधिवेशन की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने भाग लिया था, जबकि कांग्रेस ने बहिष्कार के कारण प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग नहीं लिया था। 2. मार्च 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने तथा समुद्र तट के समीप के गांवों को व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी। 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जिन्होंने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग का पुरजोर समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → अकबर ने जजिया कर कब हटाया? → उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' और स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' के वैचारिक दृष्टिकोण के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा मुख्य अंतर सही है?
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