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History of India
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बेरोजगारों की सहायता के लिए दिल्ली में "रोजगार दफ्तर" की स्थापना किसने की थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
फिरोज शाह तुगलक ने बेरोजगारी दूर करने हेतु रोजगार दफ्तर खोला।
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प्राचीन भारतीय धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, जैन धर्म और बौद्ध धर्म की दार्शनिक मान्यताओं तथा संस्थागत विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) सिद्धांत के अनुसार ज्ञान सापेक्ष और बहुआयामी होता है, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (हेतुवाद) सिद्धांत के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रत्येक कार्य और घटना किसी न किसी कारण पर आधारित होती है, जो 'इदं प्रत्ययता' के नियम को दर्शाती है।
2. बौद्ध संघ में महिलाओं के प्रवेश के संदर्भ में, गौतम बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनंद के विशेष अनुरोध पर वैशाली में सर्वप्रथम महिलाओं को संघ में प्रविष्ट होने की अनुमति दी, तथा प्रथम महिला भिक्षुणी बुद्ध की सौतेली माता महाप्रजापति गौतमी बनी थीं।
3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महावीर स्वामी ने त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) के साथ-साथ अत्यंत कठोर कायाक्लेश और संलेखना (संथारा) पद्धति को अनिवार्य माना, जबकि बौद्ध धर्म ने मध्यम मार्ग (अमध्याम प्रतिपदा) का अनुसरण करते हुए अतिवादी कायाक्लेश का पुरजोर विरोध किया।
4. द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में कालाशोक के संरक्षण में हुआ था, जिसमें बौद्ध संघ पूर्ण रूप से 'स्थविरावद' (थेरवाद) और 'महासांगिक' नामक दो प्रमुख संप्रदायों में स्थायी रूप से विभाजित हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण, कराची अधिवेशन (1931) और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी ब्रिटेन से द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में असफल होकर लौटे, तो वायसराय लॉर्ड वेलिंगटन ने गांधीजी से मिलने से स्पष्ट इनकार कर दिया और कांग्रेस तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन के पुनः दमन के लिए अध्यादेश (Ordinances) का सहारा लिया।
2. मार्च 1931 में आयोजित कांग्रेस के कराची अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में 'गांधी-इरविन समझौते' को औपचारिक स्वीकृति दी गई तथा पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ 'कम्युनल अवार्ड' और सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोही ताकतों के नेतृत्व, रणनीतिक प्रबंधन और उसके उपरांत हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का उत्तराधिकारी घोषित किया और अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य राजनीतिक सलाहकार तथा कूटनीतिक दूत नियुक्त किया, जिन्होंने लंदन तक जाकर ब्रिटिश संसद में अपनी पेंशन और अधिकारों की पैरवी की थी।
2. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के बाद ब्रिटिश सैनिकों और नागरिकों को सुरक्षित इलाहाबाद भेजने के समझौते के दौरान हुई 'सती चौरा घाट हत्याकांड' की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया।
3. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे कानपुर से निकलकर कालपी पहुँचे और बाद में ग्वालियर की सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक दुर्जेय सैन्य अभियान का संचालन किया।
4. नाना साहब अंग्रेजों के हाथ आने के बजाय अंततः नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जहाँ उनका अंतिम जीवन और उनकी मृत्यु का रहस्य कभी स्पष्ट नहीं हो सका, जबकि तात्या टोपे को उनके एक मित्र के विश्वासघात के कारण शिवपुरी में पकड़कर 18 अप्रैल 1859 को फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक, आर्थिक एवं नगरीय विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु घाटी सभ्यता के नगरों में घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर खुलने की सामान्य परंपरा थी, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को आवागमन में सुविधा हो सके, तथा लगभग प्रत्येक घर में निजी कुएँ और स्नानघर के अवशेष मिले हैं।
2. लोथल और चान्हूदो दोनों ही स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के प्रमाण मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सभ्यता उन्नत हस्तशिल्प और आभूषण निर्माण तकनीक से परिचित थी।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों पर 'पशुपति शिव' (आद्य-शिव) का अंकन मिलता है, जिनके चारों ओर बाघ, हाथी, गैंडा और भैंसा तथा उनके पैरों के पास दो हिरण बैठे हुए हैं, जो इस काल की धार्मिक मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
4. इस सभ्यता के लोग लोहे की धातुकर्म तकनीक से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अपने कृषि उपकरणों तथा रक्षात्मक हथियारों के निर्माण में लोहे का बड़े पैमाने पर उपयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास और 'नरम दल-गरम दल' काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) के दौरान नरमपंथी नेताओं द्वारा अपनाई गई कार्यशैली को उग्र राष्ट्रवादियों ने 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) की संज्ञा दी थी, क्योंकि उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता और क्रमिक सुधारों में था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के मुद्दे को लेकर नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच तीखा मतभेद हुआ, किंतु गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का प्रस्ताव केवल बंगाल तक सीमित रखते हुए समूचे देश में लागू करने से बचा गया।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से पहली बार दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का आधिकारिक रूप से प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे गरमपंथियों की एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जाता है।
4. सूरत के 1907 के विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने दमन और अनुनय की 'मॉर्ले-मिंटो नीति' अपनाई, जिसके तहत वर्ष 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम के माध्यम से मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था कर कांग्रेस के भीतर और राष्ट्रीय आंदोलन में सांप्रदायिक विभाजन की नींव रख दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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