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History of India
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फिरोज शाह तुगलक ने केवल चार करों को मान्यता दी, इसमें "खराज" क्या था?

Detailed Explanation

खराज को भू-राजस्व के रूप में मान्यता दी गई थी।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी के प्रयोग की बात सामने आने पर भारतीय सिपाहियों में भारी आक्रोश फैल गया। 2. 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग का पुरजोर विरोध करते हुए एडजुडेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर गोली चला दी थी। 3. मंगल पांडे की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने तुरंत प्रभाव से संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल को हमेशा के लिए वापस ले लिया और चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग पूर्णतः बंद कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण, गांधी-इरविन समझौते तथा गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की शर्त स्वीकार की थी, किंतु भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी की सजा को माफ करने की गांधीजी की मांग को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया था। 2. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, और इस सम्मेलन में उन्होंने अछूतों के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा मांग किए गए 'पृथक निर्वाचक मंडल' का पूर्ण समर्थन किया था। 3. गांधी-इरविन समझौते के अनुपालन के परिणामस्वरूप कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया था तथा कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया था। 4. वर्ष 1932 में जब गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से निराश होकर भारत लौटने के पश्चात पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया, तब वाइसराय लॉर्ड विलिंगडन ने अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया और दमनकारी अध्यादेशों के माध्यम से आंदोलन को कुचल दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिनका दमन करने के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल रेनार्ड को भेजा गया था, जबकि बरेली में खान बहादुर खान ने सरकार का गठन किया जिसे अंततः मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल द्वारा कुचल दिया गया। 2. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जहाँ कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यधिक क्रूरता और दमनकारी नीतियों के साथ इस विद्रोह को पूरी तरह से कुचल दिया था। 3. फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा गया, जिन्हें पुवायाँ के राजा की गद्दारी के कारण मार डाला गया था, और उनके दमन के उपरांत अवध क्षेत्र में ब्रिटिश शासन पुनः स्थापित हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं तथा उनके दमन से जुड़े ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह (नेतृत्व) एवं जनरल कैंपबेल (दमन) 2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर कॉलिन कैंपबेल (दमन) 3. इलाहाबाद — मौलवी लियाकत अली (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन) 4. फैजाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं ह्यूरोज़ (दमन) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? महात्मा गांधी के भारत के प्रारंभिक राजनीतिक आंदोलनों — चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकटिया' प्रणाली थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल का उत्पादन सामान्य वर्ष के एक-चौथाई (25%) से भी कम रह गया था, तब राजस्व संहिता के नियमानुसार किसानों का लगान पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए था, किंतु ब्रिटिश प्रशासन ने इसे मानने से इनकार कर दिया था। 3. असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन (1920) में कांग्रेस द्वारा असहयोग के प्रस्ताव की औपचारिक पुष्टि की गई, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के साथ-साथ सरकारी अदालतों, स्कूलों और विधान परिषदों के त्याग का आह्वान किया गया था। 4. चौरी-चौरा की हिंसक घटना के पश्चात बारडोली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसका उस समय देश के सभी प्रमुख युवा और वरिष्ठ नेताओं ने बिना किसी मतभेद के पूर्ण समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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