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History of India
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मोहम्मद बिन तुगलक ने इब्न बतूता को अपना राजदूत बनाकर किस देश भेजा था?

Detailed Explanation

इब्न बतूता को चीन के राजदूत के रूप में भेजा गया था।
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और जागीरदारी संकट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' पूरी तरह से वंशानुगत थी, जिसमें मनसबदार की मृत्यु के बाद उसका पद और जात-सवार का दर्जा उसके पुत्र को स्वतः ही प्राप्त हो जाता था। 2. जहाँशाह या शाहजहां के शासनकाल के उत्तरार्ध में और विशेष रूप से औरंगजेब के काल में 'जात' और 'सवार' के पदों में भारी असंतुलन पैदा हो गया था, जिसे 'दुस्साहस या बेतन की कमी' (बे-जागीरी की समस्या) के रूप में जाना जाता है। 3. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान दक्षिण के अभियानों (डेक्कन टर्बुलेंस) के चलते जागीरों की मांग और उपलब्धता के बीच भारी अंतर आ गया था, जिससे अमीर वर्ग के बीच खालसा भूमि को जागीर में बदलने के लिए तीव्र संघर्ष शुरू हो गया था। 4. मनसबदारों के वेतन भुगतान के लिए दो प्रकार की प्रणालियां प्रचलित थीं - नगद वेतन प्राप्त करने वाले 'नगदी' और जागीर के माध्यम से आय प्राप्त करने वाले 'जागीरदार', किंतु औरंगजेब के अंतिम वर्षों में जागीरों की अत्यधिक कमी के कारण सैनिकों को वेतन के बदले केवल कागजी पर्चियां (तलबोर्) मिलने लगी थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1857 को चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस की पराजय के साथ हुई, जहाँ स्थानीय जनता और सैनिकों ने बेगम हजरत महल के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी। 2. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर प्रशासनिक और सैन्य संचालन अपने हाथों में लिया, तथा लखनऊ की रेजिडेंसी की लंबी घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनाओं को घोर कठिनाइयों में डाला। 3. फैजाबाद से अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और कैंपबेल तथा आउट्राम की संयुक्त सेनाओं को कड़ा मुकाबला दिया था। 4. लखनऊ के अंतिम पतन के उपरांत बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेनाओं के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और आजीवन ब्रिटिश पेंशन स्वीकार कर कलकत्ता में निवास किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पुवायाँ के राजा के विश्वासघात के बाद अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गांधीजी जब चंपारण पहुँचे, तो वहाँ ब्रिटिश प्रशासन द्वारा उन पर जिला छोड़ने का आदेश दिया गया, जिसका गांधीजी ने सविनय अवज्ञा करते हुए आदेश मानने से इनकार कर दिया और अंततः सरकार को 'तिनकठिया प्रथा' को समाप्त करना पड़ा। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब हो जाने के कारण किसानों ने राजस्व छूट की माँग की थी, जहाँ गांधीजी के साथ-साथ वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने भी नेतृत्व किया था, और इस संघर्ष के दौरान ही सरकार ने यह नियम बनाया कि अगली फसल तक राजस्व पूरी तरह माफ रहेगा। 3. वर्ष 1918 के ही अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में गांधीजी ने पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का प्रयोग किया था, जो मिल मालिकों और मजदूरों के बीच 'प्लैग बोनस' को लेकर था, और अंततः ट्रिब्यूनल द्वारा 35 प्रतिशत बोनस देने का निर्णय सुनाया गया। 4. वर्ष 1920-22 के असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन कर भाषावार प्रांतीय कांग्रेस कमेटियों का गठन किया गया और अहिंसक साधनों द्वारा 'स्वराज' प्राप्ति को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य बनाया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया है, जिसके अंतर्गत स्वामी (राजा), आमात्य (मंत्री), जनपद (क्षेत्र/जनसंख्या), दुर्ग (किला), राष्ट्र/कोष (खजाना), सेना और मित्र को राज्य के सात आवश्यक अंग माना गया है। 2. मौर्य प्रशासन में 'समाहर्ता' (Samaharta) का मुख्य कार्य आय का संग्रह करना, वार्षिक बजट तैयार करना और साम्राज्य के सभी आर्थिक स्रोतों की देखरेख करना था, जबकि 'संनिधातृ' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और अन्डार (भंडारगृह) का मुख्य संरक्षक अधिकारी था। 3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति केवल साम्राज्य के भीतर बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए की गई थी, और उनका प्रशासनिक या न्यायिक मामलों से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। 4. मौर्य काल में व्यापारिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए 'अध्यक्ष' प्रणाली की व्यवस्था थी, जिसमें पण्य अध्यक्ष (वाणिज्य का अध्यक्ष), संस्धान अध्यक्ष (बाजार का अध्यक्ष) और लक्षणाध्यक्ष (मुद्रा का अध्यक्ष) प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य संगठन और राजस्व प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद, जिसे 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, में मंत्रियों के पद वंशानुगत होते थे और प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन न होकर अपने सैन्य विभाग का स्वतंत्र प्रमुख होता था। 2. राजस्व प्रशासन के अंतर्गत शिवाजी ने मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था के आधार पर ज़मीन की पैमाइश कराई और उपज का प्रारंभिक 33% हिस्सा राज्य को कर के रूप में निर्धारित किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था। 3. मराठा साम्राज्य के दायरे से बाहर के मुगल क्षेत्रों से सुरक्षा प्रदान करने के बदले वसूला जाने वाला 'चौथ' कर कुल राजस्व का 25% होता था, जबकि 'देशमुखी' कर उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जहाँ मराठों का पारंपरिक वंशागत राजस्व अधिकार स्वीकार किया गया था। 4. शिवाजी की सेना में घुड़सवार सेना का भाग अत्यधिक महत्वपूर्ण था, जिसमें नियमित और स्थायी घुड़सवार सैनिकों को 'बरगीर' कहा जाता था, जबकि वे सैनिक जो अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे, उन्हें 'सिलहदार' कहा जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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