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History of India
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प्रसिद्ध मोरक्को यात्री "इब्न बतूता" किसके शासनकाल में भारत आया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इब्न बतूता 1333 ई. में भारत आया था।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और शिवाजी की सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी के अष्टप्रधान मंत्रिमंडल में 'पंडितराव' का मुख्य कार्य धार्मिक मामलों, दान-पुण्य और समाज में धार्मिक शुद्धता या आचार-विचार की देखरेख करना था, जबकि 'न्यायधीश' सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी था जो सैन्य और दीवानी मामलों में अंतिम निर्णय लेता था।
2. शिवाजी की घुड़सवार सेना दो प्रमुख भागों में विभाजित थी — 'बरगीर', जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, तथा 'सिलहदार', जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार सुसज्जित करते थे।
3. चौथ और देशमुखी कर प्रणाली के अंतर्गत 'चौथ' पड़ोसी क्षेत्रों से बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला कुल राजस्व का एक-चौथाई (25%) हिस्सा था, जबकि 'देशमुखी' मराठा साम्राज्य के आंतरिक क्षेत्रों में वसूला जाने वाला अतिरिक्त 10% लगान था जिसे वतन पर अधिकार के रूप में लिया जाता था।
4. शिवाजी के काल में केंद्रीय प्रशासन और राजस्व वसूली के लिए पारंपरिक आनुवंशिक देशस्थ ब्राह्मणों और कुलकर्णी अधिकारियों के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था, और उनके स्थान पर केवल केंद्र द्वारा सीधे नियुक्त किए जाने वाले वेतनभोगी अधिकारियों को ही तैनात किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक दृष्टिकोण, कार्यप्रणाली और राजनीतिक उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपालकृष्ण गोखले) का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था और वे मुख्य रूप से 'प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की उदारवादी पद्धति में विश्वास रखते थे, जबकि गरमपंथी नेता (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ब्रिटिश शासन के प्रति पूर्ण असहयोग और 'आत्म-निर्भरता' पर बल देते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को पूरे देश में विस्तारित करने के प्रश्न पर नरम दल और गरम दल के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए; जहाँ गरमपंथी इसे संपूर्ण भारत में लागू करना चाहते थे, वहीं नरमपंथी इस आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखना चाहते थे।
3. कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन (1906) में बाल गंगाधर तिलक या लाजपत राय को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के नरमपंथियों के प्रबल विरोध के कारण सर्वसम्मति से गोपालकृष्ण गोखले को अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'स्वराज' (Dominion Status या औपनिवेशिक स्वराज्य) को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से दोनों दलों के बीच हिंसक झड़पों और वैचारिक असहमतियों के कारण सूरत विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पर नरमपंथियों का नियंत्रण हो गया और गरमपंथियों को लगभग एक दशक के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. मेजर जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम - लखनऊ में ब्रिटिश रेजिडेंसी की रक्षा और विद्रोहियों के दमन से जुड़े थे।
2. सर कॉलिन कैंपबेल - इन्होंने मुख्य रूप से कानपुर और लखनऊ में विद्रोह का अंत किया तथा अंततः रोहिलाखंड क्षेत्र को पुनः अपने नियंत्रण में लिया।
3. जनरल ह्यूरोज़ - इन्होंने केंद्रीय भारत और बुंदेलखंड क्षेत्र में अभियान चलाते हुए झाँसी और ग्वालियर में विद्रोह को पूरी तरह कुचला।
4. कर्नल नील - इन्होंने बनारस और इलाहाबाद में विद्रोहियों के विरुद्ध अत्यधिक क्रूरतापूर्ण कार्रवाई की और शांति स्थापित की।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके प्रारंभिक सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गांधीजी जब बिहार पहुँचे, तो वहाँ के यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' पद्धति के अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान गांधीजी ने किसानों को फसल खराब होने के बावजूद सरकार द्वारा पूरा भू-राजस्व वसूले जाने के विरुद्ध 'लगान न देने' (No-Tax campaign) का स्पष्ट आह्वान किया था, और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल पहली बार गांधीजी के संपर्क में आए थे।
3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के उपरांत जब गांधीजी ने बारડોली में कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को अचानक स्थगित करने का निर्णय लिया, तो सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे प्रमुख नेताओं ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान ही कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में गांधीजी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का चित्तरंजन दास ने विरोध किया था, किंतु नागपुर के वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920) में सी.आर. दास ने स्वयं असहयोग के मुख्य प्रस्ताव का प्रारूप तैयार किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में बागियों के नेतृत्व, मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति तथा प्रशासनिक और सैन्य संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद, अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को सैनिकों द्वारा औपचारिक रूप से 'हिन्दुस्तान का शहंशाह' घोषित किया गया, किंतु जफर ने इस पद को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था और वे पूरी तरह अंग्रेजों के प्रति वफादार बने रहे।
2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और प्रशासनिक नियंत्रण एक 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में था, जिसमें विभिन्न रेजीममेंट्स से आए चुने हुए सिपाही और अधिकारी शामिल थे, और सम्राट की स्थिति केवल एक प्रतीकात्मक प्रमुख जैसी थी।
3. ब्रिटिश सेना ने जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिसके दौरान हुमायूं के मकबरे में छिपे बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पुत्रों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
4. दिल्ली के पतन के उपरांत ब्रिटिश सरकार द्वारा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया और उन्हें निर्वासित करके रंगून (बर्मा) भेज दिया गया, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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