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History of India
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दिल्ली के निकट "तुगलकाबाद" नामक नए शहर और किले का निर्माण किसने करवाया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद बसाया था।
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक पक्षों, सिलसिलों और उनके प्रमुख संतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूफी संतों का 'चिश्ती सिलसिला' भारत में संगीत (समां) और स्थानीय भाषा के प्रयोग के प्रति अत्यधिक उदार था, जबकि 'सुहरावर्दी सिलसिला' राजकीय संरक्षण, जागीर और धन-संपत्ति स्वीकार करने में विश्वास रखता था।
2. भक्ति संत रामानंद ने जाति व्यवस्था और ऊंच-नीच के भेदभाव का खंडन करते हुए रामभक्ति का उपदेश दिया, और उनके शिष्यों में केवल सवर्ण जातियों के लोग ही शामिल थे, क्योंकि वे शूद्रों को दीक्षा देने के विरोधी थे।
3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय ने पंढरपुर के विठ्ठल (विठोबा) की पूजा को केंद्र में रखकर भक्ति आंदोलन को जनसाधारण तक पहुंचाया, और इस संप्रदाय के संतों ने संस्कृत के स्थान पर मराठी भाषा में अभंगों की रचना की।
4. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने निर्गुण भक्ति पर जोर दिया और जाति, वर्ण तथा लिंग आधारित भेदभाव को अस्वीकार करते हुए 'लंगर' की प्रथा को संस्थागत रूप दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "कनकुत" (Kankut) विधि का अर्थ क्या था?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (नरम दल काल) के दौरान ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टिकोण और कार्यप्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था, जिसके कारण उन्होंने 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति को अपनी मुख्य राजनीतिक रणनीति बनाया।
2. गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा वर्ष 1905 में स्थापित 'सर्वेंट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी' (Servants of India Society) का मुख्य उद्देश्य देश में राजनीतिक आंदोलनों को उग्र बनाना और ब्रिटिश वस्तुओं के पूर्ण बहिष्कार का प्रचार करना था।
3. नरमपंथियों द्वारा ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण के सिद्धांत (Drain of Wealth) को उजागर किया गया, जिसके तहत दादाभाई नौरोजी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में यह दर्शाया कि किस प्रकार भारत की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटेन की ओर बह रहा है।
4. कांग्रेस के 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमदल और गरमदल के बीच हुए विभाजन का मुख्य कारण लाला लाजपत राय को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित करना था, जिसका नरमपंथियों ने कड़ा विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1920 के दशक के उत्तरार्ध) के दौरान गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) और उससे संबंधित गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में इस संगठन का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' रखा गया था और इसमें समाजवादी विचारधारा को प्रमुखता दी गई थी।
2. लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए इसी संगठन के सदस्यों (भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आज़ाद) ने दिसंबर 1928 में लाहौर के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जॉन सॉंडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
3. केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में 8 अप्रैल 1929 को पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में बम फेंकने की ऐतिहासिक घटना में भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त शामिल थे, और इस घटना का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहनों को बहरी आवाज सुनाना' था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (विशेषकर पल्लव, चालुक्य और चोल) के राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा को अत्यधिक प्रोत्साहन मिला और कन्नौज में आयोजित भव्य धर्मसभा का मुख्य उद्देश्य ह्वेनसांग की उपस्थिति में महायान सिद्धांतों का प्रचार करना तथा 'मोक्ष महापरिषद्' (प्रयाग) में सम्राट द्वारा अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर देना था।
2. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी (बादामी) के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित किया था और इस विजय के उपलक्ष್ಯ में 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण करते हुए महाबलीपुरम (मावलपुरम) में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी) में नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी विजय का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें चालुक्य साम्राज्य और वर्धन साम्राज्य के बीच की सीमा का उल्लेख है।
4. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने अपनी नौसैनिक शक्ति का विस्तार करते हुए मालदीव द्वीपों पर विजय प्राप्त की और श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर अधिकार कर वहाँ चोल प्रांत की स्थापना की, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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